पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। जॉर्डन में हुए हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद अमेरिका ने लगातार आठवीं रात ईरान से जुड़े ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान समर्थित सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अमेरिकी सेना के अनुसार, हालिया ड्रोन और मिसाइल हमले में दो सैनिकों की मौत हुई, एक लापता है और चार अन्य घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं। युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 16 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 430 से अधिक घायल हुए हैं।
उधर, ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी नेता इब्राहिम अजीजी ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी सैनिक अपनी सुरक्षा चाहते हैं तो उन्हें तुरंत क्षेत्र छोड़ देना चाहिए। वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि हमले नहीं रुके तो ईरान और उसके सहयोगी ऐसा जवाब देंगे जिसे अमेरिका कभी नहीं भूलेगा।
तनाव के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं भी बढ़ गई हैं। अमेरिकी ऊर्जा कंपनी HKN Energy ने सुरक्षा कारणों से इराक के कुर्द क्षेत्र में अपना तेल उत्पादन रोक दिया है। वहीं, इराक के एरबिल स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास ड्रोन हमले की कोशिश के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
इस बीच, कुवैत ने भी दावा किया है कि ईरानी हमले में उसकी सरकारी तेल कंपनी की एक इकाई को नुकसान पहुंचा है। लगातार बढ़ते हमलों के बीच पूरे पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
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