इथेनॉल आधारित ईंधन का विस्तार भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यह दावा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के संयुक्त अध्ययन में किया गया है।
जेएनयू के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप द्वारा किए गए इस अध्ययन का नेतृत्व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी ने किया। शोध में दिल्ली-एनसीआर के ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े 300 से अधिक प्रतिभागियों, उद्योग विशेषज्ञों, आपूर्तिकर्ताओं, उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों की राय शामिल की गई।
अध्ययन के अनुसार, भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड तकनीक, इथेनॉल आधारित ईंधन और उन्नत वाहन सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
शोध में यह भी सामने आया कि 85.6 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ पहल का समर्थन किया, जबकि 78 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने भारतीय वाहनों की गुणवत्ता, सुरक्षा, माइलेज और रखरखाव से जुड़ी जानकारी उपभोक्ताओं तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने की जरूरत बताई।
अध्ययन में वाहन सुरक्षा मानकों, भारत NCAP रेटिंग, अधिक एयरबैग और बेहतर क्रैश सुरक्षा को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई है। साथ ही इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देने के साथ उपभोक्ताओं को वाहन की अनुकूलता, माइलेज, रखरखाव लागत और दीर्घकालिक प्रभावों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल आधारित ईंधन का व्यापक उपयोग ऊर्जा सुरक्षा, कृषि क्षेत्र और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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