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नितिन गडकरी ने ज्ञान दीक्षा समारोह में दिया संदेश, बोले- शिक्षा तभी सार्थक जब समाज और देश के विकास में आए काम

देव संस्कृति विश्वविद्यालय (देसंविवि), शांतिकुंज में सोमवार को 46वें ज्ञान दीक्षा संस्कार समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऑनलाइन माध्यम से विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास, चरित्र निर्माण और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

वीडियो संदेश में नितिन गडकरी ने कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा हमेशा आत्मविकास, नैतिक मूल्यों और लोककल्याण पर आधारित रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान के साथ संस्कार और सामाजिक दायित्वों को भी अपनाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, जब शिक्षा व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाने के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है, तभी उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।

उन्होंने युवाओं से नई सोच, नवाचार और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ऐसे नागरिक तैयार होने चाहिए जो अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज की बेहतरी के लिए करें।

समारोह में विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज और राष्ट्र के हित में उपयोग हो। उन्होंने नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं से अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचानने, सकारात्मक सोच विकसित करने और सेवा भाव के साथ जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पण्ड्या ने ऑनलाइन माध्यम से नवप्रवेशी विद्यार्थियों को ज्ञान दीक्षा प्रदान की। उन्होंने शिक्षा को जीवन निर्माण की सतत प्रक्रिया बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को ज्ञान, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान शांतिकुंज उप डाकघर की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष पिक्टोरियल डाक टिकट का भी विमोचन किया गया। इस स्मारक डाक टिकट में युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के समाधि स्थल का चित्र अंकित है। इसे शांतिकुंज के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान के सम्मान के रूप में जारी किया गया।

समारोह में भारतीय डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान शिक्षा, संस्कार, आत्मविकास और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर विशेष जोर दिया गया।

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