दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मापुसा कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर करने और इसकी प्रमाणित पावती अदालत में जमा करने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील
तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील पर आगे सुनवाई होनी है।
सरेंडर प्रमाणपत्र जमा करना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी करने के साथ उसका प्रमाणपत्र अदालत में दाखिल करने को कहा था। तेजपाल ने मापुसा कोर्ट में सरेंडर कर इस निर्देश का पालन किया है। प्रमाणित सरेंडर प्रमाणपत्र मिलने के बाद उनकी अपील को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
22 सितंबर को हो सकती है सुनवाई
न्यायमूर्ति अलोक अराधे की अध्यक्षता वाली पीठ ने संकेत दिया है कि यदि तरुण तेजपाल समयसीमा के भीतर आत्मसमर्पण का प्रमाणपत्र पेश करते हैं, तो उनकी अपील को 22 सितंबर को सूचीबद्ध करने पर विचार किया जा सकता है। ऐसे में अब उनकी सजा के खिलाफ दायर अपील पर होने वाली सुनवाई पर नजरें टिकी हैं।
हाईकोर्ट ने सुनाई थी 10 साल की सजा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में तरुण तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब सुप्रीम कोर्ट में उनकी अपील पर आगे की सुनवाई आत्मसमर्पण संबंधी आदेश के अनुपालन के बाद होने की संभावना है।
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