कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार पर प्रदर्शन के दौरान हुए समझौते का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए बड़ा अल्टीमेटम दिया है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं और पुलिस कार्रवाई पर रोक नहीं लगी, तो संगठन एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगा।
आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार के साथ हुई बातचीत में यह सहमति बनी थी कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र या कार्यकर्ता के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। लेकिन समझौते के बावजूद विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई जारी है, जिससे छात्रों और संगठन के सदस्यों में नाराजगी बढ़ रही है।
CJP का आरोप है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में छात्रों को हिरासत में लिया गया है, जबकि दिल्ली समेत कई राज्यों में प्रदर्शन में शामिल युवाओं और स्वयंसेवकों की निगरानी की जा रही है। संगठन का कहना है कि कुछ स्वयंसेवकों को केवल प्रदर्शनकारियों तक भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाने के कारण भी पूछताछ और हिरासत का सामना करना पड़ा।
संगठन ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस ली जाएं और गिरफ्तार छात्रों को बिना शर्त रिहा किया जाए। दूसरी, भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी या समर्थक के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज न की जाए और पुलिस कार्रवाई पूरी तरह रोकी जाए। तीसरी, सरकार द्वारा हुए समझौते का लिखित मसौदा तय समय सीमा के भीतर संगठन को उपलब्ध कराया जाए ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न रहे।
आशुतोष रांका ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तो CJP दोबारा बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। उनका कहना है कि संगठन बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन यदि समझौते का पालन नहीं हुआ तो आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।
फिलहाल सरकार की ओर से CJP के आरोपों और मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार संगठन की मांगों पर क्या फैसला लेती है और क्या आंदोलन दोबारा शुरू होता है या बातचीत के जरिए समाधान निकलता है।
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