उत्तरकाशी की हर्षिल घाटी में शनिवार शाम हुई तेज बारिश के बाद खीरगंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। नदी के तेज बहाव के साथ आए मलबे और बड़े पत्थर गंगोत्री हाईवे पर बने नारदानों में फंस गए, जिससे सड़क को नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो गया। स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया।
सूचना मिलते ही सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीम भारी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। मशीनों की मदद से नारदानों में फंसे मलबे और पत्थरों को हटाया गया तथा जलप्रवाह को वैकल्पिक मार्ग से मोड़ दिया गया। BRO की त्वरित कार्रवाई से संभावित नुकसान टल गया और कुछ देर बाद नदी का जलस्तर भी सामान्य होने लगा।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अगस्त में खीरगंगा में आई भीषण आपदा ने धराली गांव में भारी तबाही मचाई थी। उस दौरान कई मकान, होटल और गंगोत्री हाईवे का हिस्सा नदी में समा गया था। इसी वजह से इस बार जलस्तर बढ़ते ही लोगों में पिछले साल की आपदा की यादें ताजा हो गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के दौरान प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को लगातार निगरानी बनाए रखने की जरूरत है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। फिलहाल क्षेत्र में हालात नियंत्रण में हैं और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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