वाराणसी में मानव तस्करी के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। चौबेपुर पुलिस ने एक किशोरी का अपहरण कर उसे एक लाख रुपये में बेचने और जबरन शादी कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए दंपती समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने पीड़िता को बुलंदशहर से सकुशल बरामद कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, पीड़िता की एक फोन कॉल पूरे मामले के खुलासे की सबसे अहम कड़ी साबित हुई।
पुलिस के मुताबिक, 5 जुलाई को किशोरी के परिजन ने चौबेपुर थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी राहुल भारद्वाज, शिवचंदी और उसकी पत्नी मैना देवी ने किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए। इसके बाद उसे कानपुर, अलीगढ़ और मथुरा होते हुए बुलंदशहर पहुंचाया गया, जहां एक लाख रुपये में उसका सौदा कर मोहित नामक युवक से जबरन शादी करा दी गई। किशोरी को इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि उसे बेच दिया गया है।
बुलंदशहर पहुंचने के बाद किशोरी ने किसी तरह अपने चाचा को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पीड़िता को बरामद कर लिया और गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मामले में अपहरण, मानव तस्करी, बाल विवाह और पॉक्सो अधिनियम समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
वहीं, मामले में लापरवाही बरतने पर चिरईगांव चौकी प्रभारी महेश मिश्रा को निलंबित कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि किशोरी की गुमशुदगी की सूचना मिलने के बावजूद उन्होंने समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की। सहायक पुलिस आयुक्त की जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है।
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