इंस्टाग्राम पर शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का ऑनलाइन अभियान अब देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन 35वें दिन भी जंतर-मंतर पर जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पहली बार 6 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। इसके बाद 20 जून से अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही की मांग उठाई।
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस दौरान कई लोग घायल हुए। इसके बावजूद आंदोलन जारी रहा और सोशल मीडिया पर मीम्स, रील्स, पोस्टर और क्रिएटिव नारों के कारण यह अभियान लगातार चर्चा में बना रहा।
28 जून को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। 24 जुलाई को केंद्र सरकार से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया।
आंदोलन को विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए पुलिस कार्रवाई की आलोचना की।
शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की सीजेपी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक हुई। संगठन ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं—नीट से जुड़े मृत छात्रों के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि सरकार ने मुआवजा और एफआईआर पर सकारात्मक रुख दिखाया है, जबकि मंत्री के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए समय मांगा है।
सीजेपी का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा।
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