ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोरक्षा को लेकर निकाली गई धर्मयुद्ध यात्रा में प्रशासनिक बाधाओं का आरोप लगाते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि गोरक्षा के समर्थन में आवाज उठाने वालों को बुलडोजर चलाने की धमकियां दी जा रही हैं और कई समर्थकों को कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने के लिए उनके घरों में ही नजरबंद रखा गया।
लखनऊ के आशियाना स्थित एक क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में शंकराचार्य ने कहा कि यात्रा के दौरान कई स्थानों पर प्रशासन का सहयोग नहीं मिला। रात्रि विश्राम की अनुमति न मिलने के कारण कई समर्थकों को सड़क पर रात बितानी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के असहयोग के चलते प्रस्तावित ‘गो गर्जन अक्षौहिणी संकल्प’ कार्यक्रम को सार्वजनिक आयोजन के बजाय डिजिटल माध्यम से आयोजित करना पड़ रहा है।
शंकराचार्य ने बताया कि कार्यक्रम के लिए 4.64 लाख रुपये से अधिक का शुल्क जमा करने के बावजूद अंतिम समय तक प्रशासन की ओर से स्पष्ट अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर दी गई है और प्रशासन के रवैये पर आपत्ति भी दर्ज कराई गई है।
उन्होंने बताया कि अब प्रदेश की 403 विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटल माध्यम से लोग एकत्र होकर गो रक्षा का संकल्प लेंगे। दोपहर 12 से 2 बजे तक चलने वाले इस कार्यक्रम में आगे की रणनीति की भी घोषणा की जाएगी।
प्रेस वार्ता के दौरान शंकराचार्य ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में कई गंभीर अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजे गए कानूनी नोटिस का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार अपने अनुरूप बोलने वाले “सरकारी शंकराचार्य” तैयार करना चाहती है।
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