सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि दिल्ली समेत राज्य सरकारें पात्र मामलों में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने या बंद करने पर विचार कर सकती हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों पर लागू नहीं होगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि “क्रिमिनल एंटीसिडेंट” का आशय केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से जुड़े आपराधिक मामलों से है। ऐसे मामलों में एफआईआर वापस लेने का सवाल नहीं उठता।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार अपने पहले के रुख पर कायम है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल सामान्य छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, लेकिन गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े 2,700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जाएंगी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों और वकीलों के बच्चों के साथ मारपीट हुई। उन्होंने अदालत को करीब 300 वीडियो सौंपने का दावा करते हुए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कार्रवाई पर सवाल उठाए और बल प्रयोग की जांच की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की है। इससे पहले भी अदालत कह चुकी है कि केवल प्रदर्शन होने के आधार पर अत्यधिक पुलिस बल का प्रयोग उचित नहीं ठहराया जा सकता और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।
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