विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अफ्रीका दिवस 2026 के अवसर पर भारत-अफ्रीका संबंधों को लेकर व्यापक विजन पेश करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ और अफ्रीका एजेंडा 2063 दोनों क्षेत्रों के साझा विकास और मजबूत साझेदारी का आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका का रिश्ता केवल व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और साझा संघर्षों से जुड़ा हुआ है।
जयशंकर ने बताया कि भारत और अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 93 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है, जबकि अफ्रीका में भारत का कुल निवेश 80 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। यह निवेश ऊर्जा, दूरसंचार, दवा उद्योग, कृषि, बुनियादी ढांचा और डिजिटल सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में फैला हुआ है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत और अफ्रीकी देशों के बीच 150 से अधिक उच्चस्तरीय दौरे हुए हैं। भारत ने हाल के वर्षों में 17 नए दूतावास खोले हैं और अब 46 अफ्रीकी देशों में उसकी स्थायी राजनयिक उपस्थिति है।
विदेश मंत्री के अनुसार, भारत ने अफ्रीका के 40 से अधिक देशों को 10 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की लाइन ऑफ क्रेडिट उपलब्ध कराई है, जिसके तहत 220 विकास परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इसके अलावा 2015 से अब तक 70 करोड़ अमेरिकी डॉलर की अनुदान सहायता भी दी गई है।
मानव संसाधन विकास पर जोर देते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में 80 हजार से अधिक छात्रवृत्तियां और प्रशिक्षण अवसर उपलब्ध कराए हैं। वहीं ज़ांज़ीबार में आईआईटी मद्रास परिसर और युगांडा में नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी की स्थापना दोनों देशों के बढ़ते शैक्षणिक सहयोग का उदाहरण है।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा को भी साझेदारी का अहम हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत अफ्रीकी देशों के साथ शांति मिशन, रक्षा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और संयुक्त सैन्य अभ्यासों के जरिए सहयोग लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और अफ्रीका मिलकर वैश्विक दक्षिण के लिए अधिक समृद्ध, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य का निर्माण करेंगे।
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