अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन में बड़ा बदलाव होने की तैयारी है। चढ़ावा चोरी मामले के बाद मंदिर प्रशासन, वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों की सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की योजना बनाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट और मंदिर संचालन में अनुभवी अधिकारियों तथा संघ से जुड़े लोगों की भूमिका बढ़ाई जा सकती है।
जानकारी के मुताबिक, मंदिर प्रबंधन के लिए नया प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा, जिसमें हर अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी लिखित रूप से तय होगी। इसके साथ ही यह भी निर्धारित किया जाएगा कि कौन किसे रिपोर्ट करेगा और किस स्तर पर जवाबदेही होगी। ट्रस्ट के सदस्यों और पदेन सदस्यों की भूमिकाएं भी पहली बार स्पष्ट रूप से तय की जा सकती हैं।
सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद मंदिर प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू की जाएगी। इसके तहत चढ़ावा गिनने और वित्तीय लेनदेन की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति के पास न होकर कई स्तरों पर बांटी जाएगी, जिससे पारदर्शिता और निगरानी बढ़ सके।
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिकाओं में बदलाव किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर नए चेहरों को भी ट्रस्ट और प्रबंधन व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला एसआईटी रिपोर्ट और संघ नेतृत्व की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
इस बीच, मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और ट्रस्ट के पदेन सदस्य नृपेंद्र मिश्रा ने भी माना है कि ट्रस्ट सदस्यों की जवाबदेही और कार्यों का स्पष्ट बंटवारा अब तक तय नहीं था। उनके बयान के बाद मंदिर प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर राम मंदिर के लिए भी पेशेवर प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इसके तहत किसी वरिष्ठ या सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जैसी जिम्मेदारी सौंपने पर भी विचार किया जा रहा है।
satyamorcha.com Hindi News, latest and breaking news in Hindi