उत्तराखंड के शहरी निकायों में अधिशासी अधिकारियों (ईओ) की कमी को दूर करने के लिए शहरी विकास निदेशालय ने विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों को प्रभारी ईओ की जिम्मेदारी सौंप दी है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और नियुक्तियों को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
जारी आदेशों के अनुसार क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर निरीक्षक, कर अधीक्षक, टैक्स वसूली कर्मचारी और लेखा कर्मचारियों को विभिन्न नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में प्रभारी अधिशासी अधिकारी बनाया गया है। विभाग का कहना है कि नियमित ईओ के कई पद खाली होने के कारण यह व्यवस्था की गई है।
दरअसल, विभाग के पास कुल 60 अधिशासी अधिकारी हैं, जिनमें से कई की तैनाती नगर निगमों में होने से अन्य निकायों के पद खाली हो गए। इन्हीं रिक्त पदों पर अस्थायी रूप से प्रभारी ईओ नियुक्त किए गए हैं।
हालांकि, इस निर्णय पर नियमों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निकाय सेवा नियमावली, 2019 के तहत अधिशासी अधिकारी की नियुक्ति पदोन्नति या उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाती है। वहीं, पूर्व में लागू व्यवस्थाओं के अनुसार ईओ का प्रभार वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को दिए जाने की परंपरा भी रही है।
इस मामले में नैनीताल हाईकोर्ट भी निकायों में प्रभारी व्यवस्था और कर्मचारियों की कमी को लेकर राज्य सरकार को निर्देश दे चुका है। अदालत ने सरकार से तय समय में व्यवस्था सुधारने और इस संबंध में उचित निर्णय लेने को कहा था।
शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने नियुक्तियों का बचाव करते हुए कहा कि यह व्यवस्था नई नहीं है। उनके अनुसार, जिन कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, वे पहले भी प्रभारी ईओ के रूप में कार्य कर चुके हैं। नियमित अधिशासी अधिकारियों के रिक्त पदों के चलते यह कदम उठाया गया है।
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