उत्तर प्रदेश की पहचान अब पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम से भी होने लगी है। प्रदेश से निकले आठ स्टार्टअप एक अरब डॉलर से अधिक के मूल्यांकन वाले यूनिकॉर्न बन चुके हैं, जबकि एक अन्य कंपनी सूनिकॉर्न की कतार में है।
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की सूची के अनुसार पेटीएम, फिजिक्सवाला, पाइनलैब्स, इंफोएज, मॉजलिक्स, इंडियामार्ट, इनोवेसर और रेटगेन यूनिकॉर्न बन चुके हैं। वहीं रैफे एमफिन सूनिकॉर्न है। इन कंपनियों को यूनिकॉर्न बनने में करीब 10 से 25 साल का समय लगा।
2017 से पहले सिर्फ 120 स्टार्टअप थे
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं। वर्ष 2017 से पहले इनकी संख्या महज 120 थी। अब यूपी देश का चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और प्रदेश के सभी 75 जिलों में कम से कम एक स्टार्टअप सक्रिय है।
पेटीएम और फिजिक्सवाला की अलग पहचान
वर्ष 2000 में शुरू हुआ पेटीएम आज डिजिटल वित्तीय क्षेत्र का बड़ा मंच बन चुका है। वहीं फिजिक्सवाला ने 2016 में यूट्यूब चैनल से शुरुआत की और 2020 में कंपनी के रूप में स्थापित हुआ। आज यह ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख नाम है।
पाइनलैब्स की शुरुआत 1998 में हुई थी और यह डिजिटल भुगतान व मर्चेंट कॉमर्स के क्षेत्र में काम करती है। 1995 में शुरू हुई इंफोएज ने नौकरी डॉट कॉम से सफर शुरू किया और बाद में विवाह, रियल एस्टेट और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया। मॉजलिक्स, इंडियामार्ट और रेटगेन ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत पहचान बनाई है।
एक अरब डॉलर मूल्यांकन वाली कंपनी कहलाती है यूनिकॉर्न
यूनिकॉर्न उस निजी स्टार्टअप को कहा जाता है जिसका मूल्यांकन कम से कम एक अरब डॉलर यानी करीब 8,900 करोड़ रुपये हो। वहीं जिस कंपनी के जल्द यूनिकॉर्न बनने की संभावना हो, उसे सूनिकॉर्न कहा जाता है।
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार के अनुसार प्रदेश की स्टार्टअप नीति के जरिये निवेश और विस्तार के अवसर उपलब्ध कराकर कारोबारी माहौल बेहतर बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य यूपी के स्टार्टअप को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाना है। इसके लिए एआई, डीप-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थ टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
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