बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर सियासी समीकरण फिर चर्चा में हैं। इसी घटनाक्रम के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया। पार्टी के अंदरूनी घटनाक्रम को लेकर अशोक सिद्धार्थ और कुछ बड़े पदाधिकारियों के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी की चर्चा है।
अशोक सिद्धार्थ ने अपने खिलाफ हुई कथित साजिश में कुछ पार्टी पदाधिकारियों की भूमिका का जिक्र किया है। सूत्रों के अनुसार, उनका इशारा दो बड़े पदाधिकारियों की ओर माना जा रहा है, जिनसे उनकी लंबे समय से तनातनी रही है।
दो बार पार्टी से निकाले गए थे अशोक सिद्धार्थ
बसपा में अशोक सिद्धार्थ को लेकर करीब दो वर्षों से नाराजगी की स्थिति बताई जा रही थी। उन्हें दो बार पार्टी से निष्कासित किया गया। उन पर महाराष्ट्र चुनाव में टिकट वितरण में गड़बड़ी और दिल्ली चुनाव में हस्तक्षेप के आरोप भी लगे थे।
इसके अलावा उन पर अनुशासनहीनता और पार्टी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए। हालिया कार्रवाई में उन पर उत्तर प्रदेश चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश का भी आरोप लगा था।
वर्चस्व की लड़ाई का असर आकाश आनंद पर
अशोक सिद्धार्थ और पार्टी के कुछ पदाधिकारियों के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई का असर आकाश आनंद पर भी पड़ा। आकाश के करीबियों की ओर से इन पदाधिकारियों की कार्यशैली में बदलाव की जरूरत बताए जाने की चर्चा है। हालांकि, इस बयान को पार्टी नेतृत्व के सामने अलग तरीके से पेश किए जाने की भी बात सामने आई।
अंटू मिश्रा के निष्कासन से भी बदले समीकरण
पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा का पार्टी से निष्कासन भी अशोक सिद्धार्थ से जोड़कर देखा जा रहा है। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को तीन अगस्त को और अंटू मिश्रा को इसके करीब दस दिन बाद पार्टी से बाहर किया था। अंटू मिश्रा के अशोक सिद्धार्थ से करीबी संबंधों को इसकी एक वजह माना गया।
पार्टी की राजनीति पर नजर रखने वालों का मानना है कि हालिया घटनाक्रम से बसपा के भीतर समीकरण बदल सकते हैं। इसी के साथ आकाश आनंद की भविष्य में वापसी को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं।
अशोक सिद्धार्थ ने मायावती को लिखे पत्र में क्या कहा?
राजनीति से संन्यास की घोषणा करते हुए अशोक सिद्धार्थ ने मायावती को भावुक पत्र लिखा। उन्होंने खुद पर पार्टी पर कब्जा करने के आरोपों को साजिश बताते हुए कहा कि उनके विरोधियों ने यह साजिश रची है और एक दिन इसकी सच्चाई सामने आएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने आकाश आनंद को कभी गुमराह नहीं किया और पिछले कई महीनों से उनसे मुलाकात तक नहीं हुई। सिद्धार्थ ने मायावती से अपने संन्यास के फैसले को आकाश आनंद की वापसी से नहीं जोड़ने का अनुरोध भी किया।
उन्होंने कहा कि मायावती का आदेश उनके लिए रिश्ते-नातों और परिवार से भी ऊपर है। सिद्धार्थ ने गौतम बुद्ध और कांशीराम की कसम खाकर कहा कि उन्होंने कभी पार्टी हित के खिलाफ काम नहीं किया।
उन्होंने यह भी कहा कि आकाश आनंद को जिम्मेदारी देना मायावती का निर्णय था। यदि उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन से पार्टी के मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो वह तत्काल राजनीति से संन्यास ले रहे हैं।
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