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राहुल-खड़गे ने PM मोदी को लिखा पत्र, राम मंदिर ट्रस्ट के खातों की पारदर्शी जांच की मांग

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने क्षेत्र में अपने करीब 50 हजार सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा है, जबकि अमेरिकी सेना लगातार नौवीं रात ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले कर रही है। दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है।

अमेरिकी सेंटकॉम के मुताबिक, ताजा हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और नागरिक नाविकों पर हमलों में किया गया।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का नियंत्रण है और ईरान को भारी सैन्य नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को भी बड़ा झटका लगा है।

उधर, कुवैत ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरान की ओर से किए गए ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया। वहीं ईरान ने अमेरिका पर अबादान समेत कई अहम ठिकानों पर हमले का आरोप लगाया है।

ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने शांति समझौते से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया, इसलिए फिलहाल किसी भी तरह की वार्ता संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय ईरान की प्राथमिकता केवल अपनी सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई है।

इधर, कतर के अमीर और इराक के प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय तनाव कम करने तथा अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते को लागू करने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही सुरक्षित बनाए रखने की अपील भी की।

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