राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग तेज हुई है, लेकिन ट्रस्ट डीड और सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के अनुसार ट्रस्ट को किसी भी परिस्थिति में भंग नहीं किया जा सकता। हालांकि, ट्रस्टियों में बदलाव और व्यवस्था से जुड़े सीमित संशोधन किए जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। ट्रस्ट डीड में इसे अपरिवर्तनीय (Irrevocable) बताया गया है, यानी ट्रस्ट को समाप्त या भंग करने का कोई प्रावधान नहीं है। बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को केवल ट्रस्ट डीड की कुछ धाराओं में संशोधन का अधिकार है, लेकिन ट्रस्ट की मूल संरचना, उद्देश्य और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
ट्रस्ट डीड के अनुसार, जरूरत पड़ने पर ट्रस्टियों का इस्तीफा लिया जा सकता है या उन्हें दो-तिहाई बहुमत से हटाया जा सकता है, लेकिन पूरे ट्रस्ट को भंग करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
इस बीच, चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद राम मंदिर परिसर की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। निजी सुरक्षा कर्मियों की संख्या 300 से बढ़ाकर 350 कर दी गई है, जबकि उनका मासिक मानदेय 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस, पीएसी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ निजी सुरक्षा कर्मियों की भी तैनाती बढ़ाई गई है। साथ ही निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की गई है।
उधर, चंपत राय से लगातार जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, व्यापारी संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पदाधिकारी मुलाकात कर रहे हैं। सभी का कहना है कि एसआईटी जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए और दोषियों के खिलाफ जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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