‘370 रुपये की बिरयानी’ से जुड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे की याचिका पर शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार के साथ महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मोरे ने अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक साथ क्लब करने की मांग की है।
अलग-अलग एफआईआर को एक साथ करने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रणित मोरे की ओर से पेश वकील ने कहा कि अलग-अलग एफआईआर में लगाए गए आरोप लगभग एक जैसे हैं। ऐसे में सभी मामलों को एक साथ सुना जाना चाहिए। वकील ने यह भी बताया कि मोरे इस विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं और मामले में ट्रायल का सामना करने के लिए तैयार हैं।
कैसे शुरू हुआ 370 रुपये की बिरयानी विवाद?
यह मामला गुरुग्राम में हुए प्रणित मोरे के एक स्टैंड-अप शो से शुरू हुआ था। शो के दौरान हिमांशु जांगड़ा नाम के युवक ने अपनी डेट का अनुभव साझा किया। उसने बताया था कि डेट के दौरान चिकन बिरयानी पर करीब 370 रुपये खर्च हुए थे। इसके बाद उसने महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की।
वायरल वीडियो पर हुआ विवाद
वायरल क्लिप में हिमांशु जांगड़ा ने डेट पर खर्च किए गए पैसे के बदले शारीरिक संबंध की उम्मीद से जुड़ी बात कही थी। वीडियो में प्रणित मोरे उसकी बात पर हंसते नजर आए और उन्होंने इसे ‘पीक गुरुग्राम कंटेंट’ कहा। इसके बाद वीडियो को लेकर विवाद बढ़ गया।
महिला आयोग ने भी लिया था संज्ञान
मामला बढ़ने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को तलब किया था। आयोग ने हरियाणा के पुलिस महानिदेशक से भी मामले में कार्रवाई करने को कहा था। इसके बाद गुरुग्राम पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
महाराष्ट्र में भी दर्ज हुई एफआईआर
विवाद को लेकर महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। गुरुग्राम में भी पुलिस कार्रवाई हुई। अलग-अलग राज्यों में मामले दर्ज होने के बाद प्रणित मोरे ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
प्रणित मोरे ने मांगी थी माफी
विवाद बढ़ने के बाद प्रणित मोरे ने सोशल मीडिया पर माफी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें उस बातचीत के दौरान हस्तक्षेप करना चाहिए था, लेकिन वह भीड़ की प्रतिक्रिया में बह गए थे।
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