उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित सिखों के प्रमुख तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब में सीजन की तीसरी बर्फबारी हुई है। देर रात अचानक मौसम खराब होने के बाद यहां बर्फ गिरी, जिससे पहाड़ों की तस्वीर बदल गई और ठंड बढ़ गई। खास बात यह है कि हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को बंद होने हैं। ऐसे में यात्रा सीजन के अंतिम दौर में हुई बर्फबारी ने क्षेत्र में सर्दी का असर बढ़ा दिया है।
हेमकुंड साहिब में तीसरी बार गिरी बर्फ
हेमकुंड साहिब समुद्र तल से करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां मौसम तेजी से बदलता है और सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है। इस यात्रा सीजन में अब तक तीन बार बर्फबारी हो चुकी है। देर रात हुई ताजा बर्फबारी के बाद क्षेत्र में तापमान गिरने से ठंड का अहसास बढ़ गया है।
हेमकुंड साहिब सिख समुदाय के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। हर साल देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं। कठिन पहाड़ी रास्तों और बदलते मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं में इस पवित्र स्थल के दर्शन को लेकर खास उत्साह रहता है।
कल बंद होंगे हेमकुंड साहिब के कपाट
हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को बंद किए जाएंगे। इसके साथ ही इस वर्ष की तीर्थयात्रा का समापन हो जाएगा। कपाट बंद होने से ठीक पहले हुई बर्फबारी ने यहां के मौसम को और ठंडा कर दिया है। यात्रा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का यह विशेष अवसर होगा।
उत्तराखंड में बारिश को लेकर मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार यानी 9 अक्टूबर को भी प्रदेश के कुछ पर्वतीय इलाकों में बारिश होने की संभावना है। देहरादून, नैनीताल और पिथौरागढ़ के कुछ हिस्सों में भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, अन्य क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है।
मौसम में आए बदलाव का असर तापमान पर भी देखने को मिल रहा है। पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ रही है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में बारिश के बाद मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना हुआ है।
14 अक्टूबर तक कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तराखंड में 14 अक्टूबर तक मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कुछ स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना बनी हुई है।
हेमकुंड साहिब में कपाट बंद होने से पहले हुई ताजा बर्फबारी ने यात्रा सीजन के अंतिम दिनों को खास बना दिया है। हालांकि, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए श्रद्धालुओं को यात्रा से संबंधित आधिकारिक निर्देशों और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए।
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