उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियों के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा चर्चा में है। बृहस्पतिवार को अखिलेश यादव पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में शामिल होने पहुंचे। हालांकि, इस दौरान उन्होंने राम मंदिर जाकर रामलला के दर्शन नहीं किए। इसे लेकर संतों और भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे और रामलला के दर्शन नहीं करने का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी वह अयोध्या में रोड शो करने पहुंचे थे, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं किए थे। अब 2026 में एक बार फिर उनके अयोध्या दौरे के दौरान मंदिर नहीं जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
भागवत कथा में सामाजिक न्याय और समानता का संदेश
अयोध्या में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में शामिल हुए अखिलेश यादव ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े सामाजिक न्याय, समानता, प्रेम, दया और बंधुत्व के संदेश का उल्लेख किया। हालांकि, उनके राम मंदिर नहीं जाने को लेकर संतों ने सवाल उठाए।
महामंडलेश्वर गिरीश दास ने अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव की रामभक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने रामभक्तों पर गोली चलवाने की पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अखिलेश यादव का रामलला के दर्शन नहीं करना उनकी धार्मिक आस्था को लेकर सवाल खड़े करता है।
राजूदास ने भी दी तीखी प्रतिक्रिया
हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले नेता सत्ता से बाहर होने पर भागवत कथा में पहुंचते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे नेताओं के प्रति सतर्क रहने की अपील की और उन पर सनातन धर्म तथा संस्कृति का अपमान करने का आरोप लगाया।
ये बयान संबंधित संतों की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं। अखिलेश यादव के राम मंदिर नहीं जाने के पीछे की वजह को लेकर उनकी ओर से इस दौरे के संदर्भ में कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण खबर में नहीं दिया गया है।
भाजपा नेताओं ने भी अखिलेश पर साधा निशाना
अखिलेश यादव के रामलला के दर्शन नहीं करने पर भाजपा नेताओं ने भी सवाल उठाए। अयोध्या के विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि रामनगरी आने के बावजूद रामलला के दर्शन नहीं करना अखिलेश यादव की अयोध्या के प्रति सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और लंबे संघर्ष का परिणाम है।
अयोध्या के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रामसेवकों पर गोली चलवाने वाली राजनीति को राम मंदिर का वैभव स्वीकार नहीं है। वहीं, पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने राम मंदिर को करोड़ों रामभक्तों की आस्था और लंबे संघर्ष का परिणाम बताया।
भाजपा के स्थानीय पदाधिकारियों ने भी अखिलेश यादव के मंदिर नहीं जाने को लेकर सवाल उठाए और रामभक्तों पर गोली चलाने की घटना का उल्लेख किया।
2022 से 2026 तक अयोध्या दौरे पर चर्चा
अखिलेश यादव वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान अयोध्या में रोड शो करने पहुंचे थे। उनका रोड शो नया घाट तक गया था, लेकिन उस समय भी उन्होंने रामलला के दर्शन नहीं किए थे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी वह फैजाबाद क्षेत्र में चुनावी कार्यक्रमों में शामिल हुए थे।
जनवरी 2024 में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के निमंत्रण को लेकर अखिलेश यादव ने कहा था कि वह समारोह के बाद दर्शन के लिए आएंगे। अब अक्टूबर 2026 में उनके अयोध्या दौरे के दौरान मंदिर नहीं जाने से यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
फिलहाल, अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। एक ओर संतों और भाजपा नेताओं ने रामलला के दर्शन नहीं करने पर सवाल उठाए हैं, वहीं इस घटनाक्रम को आगामी चुनावों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
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