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तीन बार विधायक रहे उमाशंकर, दयाशंकर विवाद से भी रहे सुर्खियों में; ऐसे बनी राजनीतिक पहचान

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक उमाशंकर सिंह का दिल्ली में निधन हो गया। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति, खासकर पूर्वांचल में शोक की लहर है। उमाशंकर सिंह बसपा के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में वे बसपा के टिकट पर जीतने वाले इकलौते विधायक बने थे, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें विधानसभा में विधायक दल का नेता भी नियुक्त किया था।

2000 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर

उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 2000 में बलिया जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतकर की थी। स्थानीय राजनीति में मजबूत पहचान बनाने के बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव का रुख किया और धीरे-धीरे पूर्वांचल की राजनीति का बड़ा चेहरा बन गए।

लगातार तीन बार बने विधायक

रसड़ा विधानसभा सीट से उमाशंकर सिंह ने 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 में भी लगातार जीत दर्ज की। लगातार तीन बार जनता का विश्वास हासिल करना उनके मजबूत जनाधार और क्षेत्र में प्रभावशाली राजनीतिक पकड़ का प्रमाण माना जाता है।

2022 में बसपा की सबसे बड़ी उम्मीद

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में बसपा का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। पार्टी को पूरे प्रदेश में केवल एक सीट पर जीत मिली और वह सीट रसड़ा से उमाशंकर सिंह ने दिलाई। इसी कारण उन्हें बसपा विधायक दल का नेता बनाया गया और वे विधानसभा में पार्टी का प्रमुख चेहरा बने।

सामाजिक कार्यों से भी बनाई अलग पहचान

राजनीति के अलावा उमाशंकर सिंह सामाजिक कार्यों और ठेकेदारी के व्यवसाय से भी जुड़े रहे। क्षेत्र में लोगों की समस्याओं के समाधान, जनसंपर्क और विकास कार्यों को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें लोकप्रिय नेता बनाया। स्थानीय स्तर पर उन्हें मददगार और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के रूप में देखा जाता था।

दयाशंकर सिंह के साथ विवाद रहा चर्चा में

उमाशंकर सिंह और उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री दयाशंकर सिंह के बीच राजनीतिक वर्चस्व को लेकर कई बार तीखी बयानबाजी देखने को मिली। सबसे चर्चित विवाद कटहल नाला पुल को लेकर हुआ, जब बिना औपचारिक उद्घाटन के पुल को यातायात के लिए खोलने पर दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। दयाशंकर सिंह ने अधिकारियों पर बसपा विधायक के दबाव में काम करने का आरोप लगाया था, जबकि उमाशंकर सिंह ने इन आरोपों का खंडन करते हुए पलटवार किया और कहा कि पुल का मामला केंद्र सरकार और एनएचएआई के अधिकार क्षेत्र में आता है।

आयकर विभाग की कार्रवाई भी रही सुर्खियों में

वर्ष 2026 में आयकर विभाग ने उमाशंकर सिंह और उनके करीबियों के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान करीबियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की खबरें भी सामने आई थीं। इस कार्रवाई ने उन्हें एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया था।

उमाशंकर सिंह का निधन बसपा और पूर्वांचल की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने संगठन और क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत पहचान बनाई और लगातार तीन बार विधायक बनकर जनता का विश्वास हासिल किया।

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