टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने साफ कर दिया है कि उनका ट्रस्ट इस विवाद से जुड़े किसी भी कानूनी खर्च का भुगतान नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि TEDT टाटा संस का शेयरधारक नहीं है, इसलिए उसे इस मामले से अलग रखा जाना चाहिए।
करीब 5,000 करोड़ रुपये के कोष वाले TEDT के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा को ईमेल भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसकी प्रति टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और दूसरे ट्रस्टी जे.एन. मिस्त्री को भी भेजी गई है।
कानूनी खर्च पर क्या है आपत्ति?
मेहली मिस्त्री ने अपने ईमेल में यह दावा नहीं किया कि फिलहाल TEDT का पैसा इस विवाद में खर्च हो रहा है। उन्होंने यह भी नहीं कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव सामने आया है। उनकी आपत्ति इस आशंका पर आधारित है कि भविष्य में ट्रस्ट से कानूनी खर्च वहन करने को कहा जा सकता है।
उन्होंने मांग की है कि इस मुद्दे को 20 नवंबर 2026 को होने वाली TEDT बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में रिकॉर्ड पर रखा जाए।
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर क्यों बढ़ा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई, जब एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को टाटा संस बोर्ड को बताया कि 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे।
इसके बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया। हालांकि, 17 सितंबर को टाटा संस बोर्ड ने 4-1 के बहुमत से चंद्रशेखरन को अगले पांच वर्षों के लिए फिर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव के खिलाफ नोएल टाटा ने वोट दिया।
टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी क्यों अहम है?
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी है। इनमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के पास 27.98 प्रतिशत और सर रतन टाटा ट्रस्ट के पास 23.56 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी 51.54 प्रतिशत बनती है, जबकि बाकी हिस्सेदारी अन्य संबद्ध टाटा ट्रस्ट्स के पास है।
TEDT सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़ा एक संबद्ध ट्रस्ट है, लेकिन मेहली मिस्त्री का कहना है कि TEDT स्वयं टाटा संस का शेयरधारक नहीं है।
लिस्टिंग को लेकर भी सामने आए मतभेद
चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के अलावा टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर भी मतभेद सामने आए हैं। टाटा ट्रस्ट्स ने 17 सितंबर को कहा था कि उसने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं दी है।
ट्रस्ट्स का कहना है कि लिस्टिंग के अलावा दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए और किसी भी फैसले से पहले सभी संभावित विकल्पों की समीक्षा जरूरी है।
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