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डूसू चुनाव में NSUI को बड़ा झटका, आपसी विवाद और बगावत के बीच नहीं मिली एक भी जीत; दीपांशु ने मारी बाजी

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में चारों केंद्रीय पदों पर वापसी की कोशिश कर रही एनएसयूआई को इस बार बड़ा झटका लगा। टिकट वितरण को लेकर सामने आई नाराजगी, आपसी कलह और बगावत का असर संगठन के अधिकृत प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर पड़ा। नतीजतन एनएसयूआई चारों केंद्रीय सीटों में से किसी पर भी जीत दर्ज नहीं कर सकी।

सबसे बड़ा उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला। एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। उन्होंने एबीवीपी के ईशू मौर्य को हराया।

ईशू मौर्य को 16,910 वोट मिले, जबकि एनएसयूआई के अधिकृत प्रत्याशी वीर चतरथ को 4,314 वोट ही मिल सके। खबर के मुताबिक, वीर चतरथ को मिले मत इस सीट पर नोटा से भी कम रहे।

अध्यक्ष पद पर भी नहीं चला एनएसयूआई का दांव

अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई ने राजस्थान के मीणा समुदाय से विजय शंकर मीणा को उम्मीदवार बनाया था। इसके जरिए संगठन ने डूसू चुनाव में लंबे समय से चर्चा में रहने वाले जाट-गुर्जर समीकरण को चुनौती देने की कोशिश की।

हालांकि, चुनाव परिणाम में जाट उम्मीदवार यश डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट प्राप्त हुए। वहीं संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। उन्होंने एनएसयूआई के बागी उम्मीदवार विशेष यादव को हराया।

टिकट बंटवारे को लेकर सामने आई नाराजगी

चुनाव परिणाम के बाद एनएसयूआई की ओर से भी संगठन के भीतर की खींचतान के असर की बात सामने आई। चुनाव से पहले दीपांशु शौकीन, विशेष यादव और समर्थ बेनीवाल समेत कई दावेदार टिकट वितरण को लेकर नाराज थे।

एनएसयूआई के अनुसार, दीपांशु शौकीन को अध्यक्ष पद से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उन्होंने यश डबास के सामने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। वह उपाध्यक्ष पद से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन संगठन ने उनकी जगह वीर चतरथ को टिकट दिया। इसके बाद दीपांशु ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और उपाध्यक्ष पद जीत लिया।

चारों केंद्रीय सीटों पर नोटा के भी महत्वपूर्ण आंकड़े

डूसू चुनाव में नोटा ने भी कई प्रमुख सीटों के चुनावी समीकरण को प्रभावित किया। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर कुल 23,942 छात्रों ने नोटा का विकल्प चुना।

खबर के अनुसार, इन सभी सीटों पर नोटा को मिले वोट विजेता और उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी के बीच जीत के अंतर से अधिक रहे।

डूसू चुनाव के नतीजों ने टिकट वितरण, बागी उम्मीदवारों और संगठन के भीतर के मतभेदों को लेकर एनएसयूआई के सामने नई चुनौतियां जरूर खड़ी की हैं।

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