समाजवादी पार्टी की मुरादाबाद सांसद रुचिवीरा और कांठ से विधायक कमाल अख्तर के बीच जारी सियासी खींचतान थमती नजर नहीं आ रही है। दोनों नेताओं के विवाद को खत्म कराने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कमाल अख्तर से विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक का पद भी वापस ले चुके हैं, लेकिन बयानबाजी का दौर अब भी जारी है।
दैनिक भास्कर से बातचीत में रुचिवीरा ने भाजपा में शामिल होने की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “अगर किसी के पास मेरे भाजपा में जाने का कोई सबूत है तो सामने लाए। मेरी विचारधारा कभी भाजपा से मेल नहीं खा सकती। मैं समाजवादी पार्टी की सिपाही हूं और आखिरी सांस तक सपा में ही रहूंगी।”
कमाल अख्तर से विवाद पर रुचिवीरा ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जो संदेश दे चुके हैं, उसका पालन सभी को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका कमाल अख्तर से कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है और चुनाव से पहले पार्टी नेताओं को बयानबाजी से बचना चाहिए।
रुचिवीरा ने अपनी बेटी को मुरादाबाद से चुनाव लड़ाने की चर्चाओं को भी अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी का जिले से चुनाव लड़ने का कभी कोई इरादा नहीं रहा और यह दुष्प्रचार भाजपा की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
भाजपा में जाने की चर्चाओं पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर ऐसी बातें फैला रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी लोकप्रियता से भाजपा घबराई हुई है और इसी वजह से उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के साथ वायरल हुई तस्वीर पर रुचिवीरा ने कहा कि यह एक सामान्य संसदीय शिष्टाचार था। उन्होंने बताया कि स्पीकर के मुरादाबाद दौरे के दौरान स्थानीय सांसद होने के नाते उनका स्वागत करना उनकी जिम्मेदारी थी और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है।
आजम खान के मुद्दे पर रुचिवीरा ने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायपालिका से उन्हें राहत मिलेगी और वे जल्द बाहर आकर पार्टी का मार्गदर्शन करेंगे।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधा। रुचिवीरा ने कहा कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर हमला है और पूरे मामले की जांच किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए। उनका कहना था कि केवल SIT जांच से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।
गौरतलब है कि सांसद रुचिवीरा और विधायक कमाल अख्तर के बीच विवाद पार्टी कार्यक्रमों में उपेक्षा, पोस्टरों में जगह न मिलने और स्थानीय संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर सामने आया था। सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में भी तीखी नोकझोंक हुई थी। बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने दोनों नेताओं को संयम बरतने और पार्टी हित को सर्वोपरि रखने की नसीहत दी थी।
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