Sunday , July 26 2026

फैक्टरी ब्लास्ट की जांच में चौंकाने वाले खुलासे, लाइसेंस से कई गुना ज्यादा बारूद मिला; हादसे की तीन अहम वजहें आईं सामने

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के गंगोह क्षेत्र स्थित कुंडाबसी गांव की पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शुरुआती जांच के अनुसार फैक्टरी के पास केवल 15 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री रखने का लाइसेंस था, लेकिन मौके पर चारों कमरों में बड़ी मात्रा में बारूद और तैयार पटाखे मिले। अधिकारियों का मानना है कि क्षमता से अधिक विस्फोटक सामग्री का भंडारण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही इस हादसे की प्रमुख वजह बन सकती है।

जांच में सामने आया कि फैक्टरी करीब पांच वर्षों से संचालित हो रही थी और उसका लाइसेंस वर्ष 2028 तक वैध था। हालांकि लाइसेंस की निर्धारित सीमा से कहीं अधिक विस्फोटक सामग्री परिसर में रखी गई थी। चारों कमरों में बारूद और पटाखे भरे हुए थे, जबकि कुछ पटाखों को खुले में धूप में सुखाया जा रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से फैक्टरी में गतिविधियां सामान्य से अधिक थीं, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस और अग्निशमन विभाग की जांच में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी भी सामने आई है। नियमों के मुताबिक पटाखा फैक्टरी आबादी से पर्याप्त दूरी पर, खुले क्षेत्र या औद्योगिक परिसर में होनी चाहिए, लेकिन यह फैक्टरी गांव से महज 300 मीटर दूर संचालित हो रही थी। भवन में एंटी-स्टेटिक फर्श, चिंगारी-रोधी निर्माण सामग्री, पर्याप्त अग्निशमन उपकरण, पानी की व्यवस्था, फायर अलार्म और सुरक्षा संसाधनों का अभाव पाया गया। फैक्टरी में काम कर रहे मजदूरों के पास भी सुरक्षा किट, विशेष जूते, दस्ताने या सुरक्षात्मक चश्मे जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं थीं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश मजदूरों का बीमा नहीं कराया गया था।

जांच एजेंसियां प्रशासनिक स्तर पर हुई लापरवाही की भी पड़ताल कर रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले भी इसी फैक्टरी में आग लगने की घटना हुई थी, लेकिन उस समय प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों का मानना है कि यदि उस घटना के बाद सुरक्षा मानकों की गंभीरता से समीक्षा की जाती तो संभवतः इस बड़े हादसे को टाला जा सकता था। अब यह भी जांच की जा रही है कि फैक्टरी को सभी नियमों का पालन किए बिना लाइसेंस कैसे मिला और समय-समय पर निरीक्षण क्यों नहीं किया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार पटाखा निर्माण के दौरान बारूद और अन्य रासायनिक पदार्थों का गलत अनुपात, तापमान में वृद्धि, रॉ मटेरियल की गलत हैंडलिंग, शॉर्ट सर्किट या ओवरलोडिंग जैसी तकनीकी वजहें भी विस्फोट का कारण बन सकती हैं। इन सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया गया है और फॉरेंसिक टीम भी नमूनों की जांच कर रही है।

शुक्रवार शाम करीब 4:30 बजे हुए इस भीषण विस्फोट में ठेकेदार दीपराज (23) और संदीप (25) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं। धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी और फैक्टरी का मलबा तथा मानव अंग सैकड़ों मीटर दूर तक बिखर गए। घटनास्थल के पास स्थित मदरसे में पढ़ रहे 100 से अधिक बच्चे बाल-बाल बच गए। जिला प्रशासन ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं, जबकि पुलिस फैक्टरी मालिक और अन्य जिम्मेदार लोगों से पूछताछ कर रही है।

Check Also

CJP प्रदर्शन के बाद सख्त हुई पुलिस, 118 जवान घायल; वीडियो और CCTV से आरोपियों की होगी पहचान

राजधानी दिल्ली में सीजेपी के ‘संसद मार्च’ के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शन में 118 से ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *