उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में नवजात जुड़वां बच्चों की कथित बिक्री का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। विशुनगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव में चर्चा है कि आर्थिक तंगी और सामाजिक बदनामी के डर से एक विधवा महिला ने अपने नवजात बेटे और बेटी को कुल 1.80 लाख रुपये में अलग-अलग लोगों को सौंप दिया। हालांकि, इस मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार, महिला ने हाल ही में राजकीय मेडिकल कॉलेज में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद कथित तौर पर बेटे को एक लाख रुपये और बेटी को 80 हजार रुपये में अलग-अलग परिवारों को दे दिया गया। इसके बाद महिला गांव छोड़कर चली गई।
बताया जा रहा है कि महिला के पति की कई वर्ष पहले सड़क हादसे में मौत हो चुकी थी। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए वह मजदूरी करती थी। इसी दौरान वह गर्भवती हुई और सामाजिक दबाव तथा आर्थिक परेशानियों के बीच यह मामला सामने आया।
विशुनगढ़ थाना पुलिस का कहना है कि अभी तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत या तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रोबेशन अधिकारी उवैदुर्रहमान सिद्दीकी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और जांच के लिए चाइल्ड लाइन की टीम भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त कानूनन अपराध है और किसी भी बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया केवल निर्धारित कानूनी नियमों और बाल कल्याण समिति की अनुमति के तहत ही पूरी की जा सकती है।
नोट: यह मामला प्रारंभिक जानकारी और स्थानीय चर्चाओं पर आधारित है। बच्चों की कथित बिक्री के दावे की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और जांच जारी है।
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