वर्ष 2018 के चर्चित एपल मैनेजर विवेक तिवारी हत्याकांड में अदालत ने दोषी पूर्व सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या के मामले में 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, मामले में आरोपी रहे सिपाही संदीप कुमार को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया गया।
लखनऊ की जिला एवं सत्र अदालत ने 17 सितंबर को प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया था। सोमवार को अदालत ने सजा का ऐलान किया। करीब आठ साल पुराने इस मामले में फैसले के दौरान विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी और उनके साले अदालत में मौजूद नहीं थे।
फैसले से संतुष्ट नहीं हैं विवेक की पत्नी
दोषसिद्धि के बाद विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने अदालत के फैसले पर असंतोष जताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें अदालत से न्याय की उम्मीद थी, लेकिन फैसला उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं आया।
कल्पना तिवारी ने प्रशांत चौधरी को प्रशिक्षित पुलिसकर्मी बताते हुए सवाल उठाया था कि गोली चलाने की घटना को महज गलती कैसे माना जा सकता है। उन्होंने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात भी कही थी।
17 सितंबर को दोषी ठहराया गया था
मामले में अंतिम बहस 6 अगस्त को पूरी हुई थी। इसके बाद 17 सितंबर को अदालत ने प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार दिया था। वहीं, दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
सोमवार को अदालत ने प्रशांत चौधरी को 10 साल के कारावास की सजा सुनाकर मामले में सजा का ऐलान किया।
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