निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की मौत से पहले उसकी जिंदगी में आर्थिक परेशानियां बढ़ने की बात सामने आई है। पुलिस जांच के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले हरिद्वार आया सुरेंद्र यहां सदाराम के नाम से रह रहा था। उसने कुछ समय नौकरी की, लेकिन बाद में काम छोड़ दिया और रोजगार की तलाश में जुट गया।
सुरेंद्र पहले पथरी क्षेत्र के मुस्तफाबाद में किराये पर रहा और बाद में सिडकुल की दीपगंगा सोसायटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगा। कुछ समय बाद उसने यह काम भी छोड़ दिया। इसके बाद उसने रोजगार के लिए चाय का खोखा लेने की कोशिश की।
चाय का खोखा लेने के बाद बढ़ी आर्थिक परेशानी
जांच में सामने आया है कि चाय का खोखा किराये पर लेने के लिए सुरेंद्र से 60 हजार रुपये एडवांस लिए गए थे। इतनी बड़ी रकम देने के बाद उसके पास रोजमर्रा के खर्च और अन्य जरूरी कामों के लिए पैसे कम पड़ गए थे। बताया गया है कि उसने किसी परिचित से आर्थिक मदद भी मांगी थी।
दिल्ली के नरेला निवासी धर्मेंद्र कौशिक के मुताबिक, सुरेंद्र काम को लेकर परेशान रहता था। कुछ दिन पहले उसने रोते हुए धर्मेंद्र से काम दिलाने में मदद मांगी थी। इसके बाद धर्मेंद्र ने उसे भूपतवाला में चाय का खोखा किराये पर दिलाने की व्यवस्था की थी।
बेटे के जन्मदिन पर भी परेशान था
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि घटना से पहले सुरेंद्र की परिवार के किसी सदस्य से फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान किसी बात को लेकर बहस होने की बात सामने आई है। फोन पर बातचीत के बाद वह काफी परेशान नजर आया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फोन पर किससे बातचीत हुई और बहस किस बात को लेकर हुई थी।
बताया गया है कि सुरेंद्र के बेटे का जन्मदिन भी था और वह उसके लिए कुछ सामान घर भेजना चाहता था, लेकिन पैसों की कमी के कारण परेशान था।
चाय के खोखे में मिला शव
शुक्रवार सुबह सुरेंद्र का शव चाय के खोखे में फंदे से लटका मिला। पुलिस उसकी मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है। जांच में उसकी आर्थिक स्थिति, 60 हजार रुपये का एडवांस, घटना से पहले हुई फोन पर बातचीत, परिवार से संबंध और हरिद्वार में उसके संपर्क में आए लोगों को शामिल किया गया है।
सदाराम के नाम से रह रहा था सुरेंद्र
धर्मेंद्र के मुताबिक, चाय का खोखा किराये पर दिलाने के दौरान सुरेंद्र से पहचान सत्यापन के लिए आईडी मांगी गई थी। उस समय उसने आईडी पास में नहीं होने की बात कही थी और बाद में देने की बात कही थी। सुरेंद्र हरिद्वार में सदाराम के नाम से रह रहा था और आसपास के लोगों व परिचितों को उसकी वास्तविक पहचान की जानकारी नहीं थी।
पुलिस की सत्यापन प्रक्रिया पर उठे सवाल
सुरेंद्र के सदाराम के नाम से रहने और चाय का खोखा संचालित करने के मामले ने स्थानीय सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि हरिद्वार आने के बाद उसका सत्यापन हुआ था या नहीं और यदि हुआ था तो उसकी वास्तविक पहचान सामने क्यों नहीं आई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर जांच के दौरान सुरेंद्र कोली की पहचान सामने आई। खोखे में मिले बैग और दस्तावेजों की जांच के बाद उसकी वास्तविक पहचान का पता चला।
सरकारी जमीन पर बना था चाय का खोखा
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि जिस खोखे में सुरेंद्र का शव मिला, वह सरकारी जमीन पर बना था। खोखा किराये पर देने वाले व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस की रिपोर्ट के बाद संबंधित विभाग सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के तहत कार्रवाई कर सकता है।
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