उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के विधायकों ने इस मामले पर चर्चा की मांग को लेकर नारेबाजी की, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जांच में किसी भी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई है और विपक्ष का आचरण सनातन विरोधी है।
सदन से बाहर पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है और सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक की जांच में किसी साधु-संत या ट्रस्ट से जुड़े लोगों की संलिप्तता सामने नहीं आई है, इसलिए पूरे संत समाज पर आरोप लगाना अनुचित है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार राम जन्मभूमि आंदोलन और भगवान श्रीराम का विरोध करती रही हैं। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए दिए गए निमंत्रण के बावजूद विपक्ष के कई नेता कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए और अब आस्था की बात कर रहे हैं।
विधानसभा के भीतर भी विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष चर्चा से बचकर व्यवधान पैदा कर रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत बताया।
हंगामे के दौरान सपा विधायक सचिन यादव द्वारा मुख्यमंत्री से जुड़ा पोस्टर दिखाने पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना नाराज हो गए। उन्होंने विधायक को सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया और दोबारा ऐसी घटना होने पर विशेषाधिकार कार्रवाई तथा सदस्यता समाप्त करने की चेतावनी दी। इसके बाद सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
विधानसभा परिसर के बाहर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और विपक्ष राज्य की छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने विपक्ष से विकास और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने की अपील की।
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