केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही करीब पांच वर्ष तक चले उनके कार्यकाल का समापन हो गया। 7 जुलाई 2021 को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रधान ने 25 जुलाई 2026 तक कुल 1844 दिन (करीब 5 वर्ष और 18 दिन) इस पद पर कार्य किया। इस दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन, पीएम श्री स्कूल योजना, डिजिटल शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी कई योजनाओं पर काम हुआ।
धर्मेंद्र प्रधान का नाम स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे समय तक शिक्षा मंत्री रहने वाले नेताओं की सूची में शामिल हो गया है। इस सूची में पहले स्थान पर स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद हैं, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से 2 फरवरी 1958 तक करीब 10 वर्ष 171 दिन तक मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। उनके बाद अर्जुन सिंह, डॉ. मुरली मनोहर जोशी और डॉ. के.एल. श्रीमाली का स्थान आता है।
वहीं, सबसे कम कार्यकाल वाले शिक्षा मंत्रियों की बात करें तो डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने 1996 में पहली बार केवल 16 दिनों तक शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया था। स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों में हुमायूं कबीर का कार्यकाल सबसे छोटा रहा, जिन्होंने 1963 में महज 82 दिनों तक मंत्रालय की कमान संभाली।
भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने देश की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके योगदान के सम्मान में हर वर्ष 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का नया नेतृत्व किसे मिलेगा, इस पर अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।
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