राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की पड़ताल में कई अहम और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि चढ़ावे की रकम की गिनती का प्रभारी बनाए गए सुभाष श्रीवास्तव का बैंकिंग सेवा के दौरान भी विवादों से नाता रहा था। वह सिंडिकेट बैंक में कार्यरत था, जहां गबन और वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में विभागीय जांच के बाद उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। बाद में अदालत के आदेश पर उसकी बहाली हुई और सेवा पूरी करने के बाद वह सेवानिवृत्त हो गया।
सेवानिवृत्ति के बाद सुभाष श्रीवास्तव को राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्त किया गया। SIT की जांच में सवाल उठे हैं कि ट्रस्ट ने उसकी नियुक्ति से पहले कोई विस्तृत बैकग्राउंड वेरिफिकेशन या जांच-पड़ताल क्यों नहीं की। सबसे गंभीर बात यह है कि उसे सीधे चढ़ावे की रकम की गणना और उससे जुड़ी पूरी व्यवस्था का प्रभारी बना दिया गया, जबकि यह मंदिर की सबसे संवेदनशील जिम्मेदारियों में से एक मानी जाती है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, सुभाष श्रीवास्तव के पास चढ़ावे की गिनती की निगरानी से लेकर नकदी को बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी थी। SIT का दावा है कि उसकी कथित मिलीभगत के चलते चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी और चोरी संभव हो सकी। यही वजह है कि उसे भी इस मामले में आरोपी बनाया गया और अब तक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में उसका नाम शामिल है।
सूत्रों के अनुसार, SIT अब केवल चोरी की घटना ही नहीं, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया की भी गहराई से जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कई कर्मचारियों की नियुक्ति बिना पर्याप्त सत्यापन और औपचारिक जांच के की गई थी। सुभाष श्रीवास्तव का मामला भी इसी जांच का प्रमुख हिस्सा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से सुभाष के अच्छे संबंध थे। इसी वजह से रिटायरमेंट के बाद उसे मंदिर में जिम्मेदारी मिलने में आसानी हुई। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुभाष अक्सर दावा करता था कि वह मंदिर में सेवा भाव से काम करता है और किसी प्रकार का वेतन नहीं लेता। वहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि गणना ड्यूटी में किस कर्मचारी को लगाया जाएगा, इसका फैसला भी काफी हद तक उसी के प्रभाव में होता था।
SIT अब यह पता लगाने में जुटी है कि नियुक्ति प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई, किन अधिकारियों ने बिना पर्याप्त सत्यापन के इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी और क्या इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी रही। जांच एजेंसी का मानना है कि इन पहलुओं की पड़ताल से चढ़ावा चोरी के पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
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