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4200 करोड़ की मेगा सौगात से बदलेगी रफ्तार, लखनऊ-कानपुर हाईस्पीड कॉरिडोर पर बाइक-ऑटो की एंट्री बैन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार देने वाली बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे परियोजना अब आम जनता के लिए तैयार है। करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 63 किलोमीटर लंबे छह-लेन एक्सप्रेसवे का सोमवार को भव्य समारोह में लोकार्पण किया गया। उन्नाव के झाऊखेड़ा गांव में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की मौजूदगी में एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इस आधुनिक हाई-स्पीड कॉरिडोर पर 14 जुलाई से वाहनों का संचालन शुरू हो जाएगा।

यह एक्सप्रेसवे लखनऊ और कानपुर के बीच रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। अभी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर भारी ट्रैफिक, चौराहों और जाम के कारण दोनों शहरों के बीच की दूरी तय करने में डेढ़ से दो घंटे तक का समय लग जाता था, लेकिन एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यही सफर महज 35 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी, साथ ही एनएच-27 पर ट्रैफिक का दबाव भी काफी कम होने की उम्मीद है।

झाऊखेड़ा में हुआ भव्य लोकार्पण, तकनीकी प्रदर्शनी का किया अवलोकन

उन्नाव के झाऊखेड़ा गांव में आयोजित उद्घाटन समारोह के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से लगाई गई विशेष तकनीकी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। अधिकारियों ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में इस्तेमाल की गई आधुनिक 3D इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों और भविष्य की विस्तार योजनाओं की जानकारी दी।

14 जुलाई से टोल वसूली शुरू, कई वाहनों की एंट्री पर रहेगा प्रतिबंध

मंगलवार 14 जुलाई से एक्सप्रेसवे पर वाहनों का संचालन शुरू होने के साथ ही टोल टैक्स की वसूली भी लागू हो जाएगी। चूंकि यह पूरी तरह कंट्रोल्ड-एक्सेस हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा और तेज रफ्तार बनाए रखने के लिए कई सख्त नियम लागू किए गए हैं।

इस मार्ग पर केवल कार, जीप, बस, ट्रक और अन्य मोटर वाहन ही चल सकेंगे। बाइक, स्कूटर, ऑटो, विक्रम, ई-रिक्शा, साइकिल, ट्रैक्टर, पशु चालित वाहन और अन्य धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।

उन्नाव को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा, इंटरचेंज से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ उन्नाव जिले को मिलने वाला है। एक्सप्रेसवे को कानपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग और उन्नाव-लालगंज मार्ग से जोड़ा गया है। इसके अलावा गंगाघाट, करेर पतारी, कोरारी और अमरसस के पास अत्याधुनिक इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिससे उन्नाव, रायबरेली, कानपुर और लखनऊ के बीच आवागमन पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज होगा।

उद्योग, व्यापार और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों के लिए भी गेम चेंजर माना जा रहा है। इससे कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र और लखनऊ के प्रशासनिक एवं आईटी हब के बीच तेज कनेक्टिविटी स्थापित होगी। माल ढुलाई की लागत घटेगी, उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी और नए निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए दोनों शहरों के बीच रोजाना यात्रा करने वाले हजारों लोगों को समय और ईंधन की बचत का सीधा लाभ मिलेगा।

एक्सप्रेसवे की प्रमुख विशेषताएं

  • लंबाई: 63 किलोमीटर
  • लागत: लगभग ₹4,200 करोड़
  • यात्रा समय: 35 से 45 मिनट
  • लेन: छह-लेन हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे
  • प्रतिबंधित वाहन: बाइक, ऑटो, ई-रिक्शा, ट्रैक्टर, साइकिल और अन्य धीमी गति वाले वाहन
  • संचालन शुरू: 14 जुलाई से
  • लाभ: तेज कनेक्टिविटी, कम ट्रैफिक, ईंधन की बचत, उद्योग और व्यापार को बढ़ावा

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