अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। एक ओर चंपत राय ने सार्वजनिक पत्र जारी कर स्वयं को निर्दोष बताते हुए एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने तक विस्तृत जवाब देने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर उनके समर्थन में संत समाज और व्यापारिक संगठन खुलकर सामने आने लगे हैं। अयोध्या में लगातार बदलते माहौल के बीच ट्रस्ट की आगामी बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां आगे की रणनीति और संभावित भूमिका को लेकर अहम निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
रामभक्तों के नाम लिखे अपने पत्र में चंपत राय ने दावा किया कि उनके साथ विश्वासघात हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में उनका नाम शामिल नहीं है और अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद वह अपने ऊपर लगाए गए प्रत्येक आरोप का तथ्यात्मक जवाब देंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अयोध्या से किसी भी तरह का दाग लेकर नहीं जाना चाहते और सत्य सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि चढ़ावा अनियमितता प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी की जांच अभी जारी है। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कई आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि ट्रस्ट के तत्कालीन पदाधिकारियों से भी पूछताछ की गई है। इसी क्रम में छह जुलाई को हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए थे। इसके बाद से ट्रस्ट के भविष्य और नेतृत्व को लेकर अयोध्या में लगातार चर्चाएं चल रही हैं।
इधर, चंपत राय के समर्थन में संत समाज की सक्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है। अयोध्या के कई प्रमुख संतों का कहना है कि जब तक एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आती और जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना न्यायसंगत नहीं होगा। उनका कहना है कि राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में चंपत राय की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, इसलिए अंतिम निष्कर्ष आने से पहले उनके बारे में किसी भी तरह का निर्णय लेना उचित नहीं है।
संत समाज के साथ-साथ अयोध्या के व्यापारिक संगठनों ने भी चंपत राय के पक्ष में अपनी राय रखी है। व्यापारियों का कहना है कि कानून के सिद्धांत के अनुसार जांच पूरी होने और दोष सिद्ध होने से पहले किसी व्यक्ति को अपराधी की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट आगे की रणनीति तय करेगा, जिससे चंपत राय की भविष्य की भूमिका और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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