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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद बड़ा बदलाव, अब कैश की जगह डिजिटल दान को मिल रही प्राथमिकता

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रद्धालुओं के दान देने के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अब पहले की तरह सोना-चांदी के आभूषण और कीमती सिक्के दानपात्र में नहीं डाल रहे हैं। मंदिर कर्मियों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में दानपात्र से एक भी बहुमूल्य आभूषण नहीं मिला है।

पहले श्रद्धालु भावनावश अंगूठी, चेन, कंगन, लॉकेट और सोने-चांदी के सिक्के तक दान कर देते थे, लेकिन चोरी की घटना सामने आने के बाद लोग अधिक सतर्क हो गए हैं। अब कीमती आभूषण दान करने वालों का नाम, पता और आभूषण का पूरा विवरण दर्ज करने की नई व्यवस्था भी लागू कर दी गई है।

मंदिर कर्मियों का कहना है कि अब बड़े नोटों और बहुमूल्य आभूषणों की संख्या में स्पष्ट कमी आई है। श्रद्धालु दान तो कर रहे हैं, लेकिन पहले की तुलना में अधिक सावधानी बरत रहे हैं।

वहीं, 23 कर्मचारियों के काम छोड़ने के बाद फिलहाल केवल 13 कर्मचारी ही चढ़ावे की गणना कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अब उन्हें लंबी शिफ्ट में काम करना पड़ रहा है, जबकि वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। छुट्टी के दिन का भुगतान भी नहीं किया जा रहा।

उधर, चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की भूमिका और वित्तीय जिम्मेदारियों की भी पड़ताल की है। हालांकि, जांच के अंतिम निष्कर्षों का आधिकारिक खुलासा अभी नहीं किया गया है।

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