अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही एसआईटी को कई अहम सुराग मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि मंदिर प्रबंधन, चढ़ावे की गिनती, जमीन खरीद और निर्माण कार्यों से जुड़े कई अहम पदों पर ट्रस्ट से जुड़े लोगों के रिश्तेदार और करीबी सक्रिय थे।
सूत्रों के अनुसार, राम मंदिर विस्तार के लिए खरीदी गई जमीनों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच में दावा किया गया है कि कई जमीनें सर्किल रेट से 17 गुना तक अधिक कीमत पर खरीदी गईं। वहीं, निर्माण सामग्री की खरीद में भी करीब 40% तक कमीशनखोरी के आरोप सामने आए हैं। एसआईटी ने जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जांच के लिए कब्जे में ले लिए हैं।
जांच में ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के रिश्तेदारों की भूमिका भी सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि मंदिर विस्तार के लिए जमीन खरीद, ठेकेदारों के भुगतान, वीवीआईपी पास जारी करने और चढ़ावे की गिनती जैसे संवेदनशील कार्यों में रिश्तेदारों और करीबी लोगों का प्रभाव था।
चढ़ावा चोरी मामले में भी कई लोगों से पूछताछ की गई है। जांच के दौरान कुछ संदिग्धों के ठिकानों से नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। एसआईटी यह भी जांच कर रही है कि चढ़ावे की रकम की गिनती और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी तो नहीं हुई।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जल्द ही उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप सकती है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। हालांकि, अभी तक जांच एजेंसियों या सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और एसआईटी सभी वित्तीय लेनदेन, जमीन खरीद और मंदिर प्रबंधन
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