ग्लोबल मार्केट में सुधरे निवेशक सेंटिमेंट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। पिछले सप्ताह देश की टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 9 के मार्केट कैप में कुल 2.15 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान भारती एयरटेल सबसे बड़ी गेनर कंपनी रही।
भारती एयरटेल का मार्केट कैप 52,432 करोड़ रुपये बढ़कर 11.63 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं, एलआईसी 51,675 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ दूसरे स्थान पर रही और उसका कुल मार्केट कैप 5.56 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, रिलायंस इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टुब्रो, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईसीआईसीआई बैंक की वैल्यू में भी इजाफा हुआ। हालांकि, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) एकमात्र ऐसी कंपनी रही, जिसके मार्केट कैप में गिरावट दर्ज की गई।
ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, बाजार में तेजी के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे। इनमें भू-राजनीतिक तनाव में कमी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक निवेशकों के सेंटिमेंट में सुधार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता कम होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान है।
बीते सप्ताह सेंसेक्स में 1,274.95 अंकों यानी 1.68% की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सेंसेक्स 607 अंक गिरकर 76,802 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 154 अंक टूटकर 24,013 के स्तर पर बंद हुआ।
मार्केट कैपिटलाइजेशन किसी कंपनी के कुल आउटस्टैंडिंग शेयरों की बाजार कीमत को दर्शाता है। शेयर कीमतों में बढ़ोतरी या गिरावट के साथ कंपनी का मार्केट कैप भी बदलता रहता है। मार्केट कैप में वृद्धि से निवेशकों की संपत्ति बढ़ती है और कंपनी के लिए पूंजी जुटाना आसान हो जाता है, जबकि गिरावट का विपरीत असर पड़ता है।
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