राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर अभिनेत्री कृतिका कामरा ने हैंडलूम उद्योग और बुनकरों के समर्थन को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करने या हैशटैग चलाने भर से बदलाव नहीं आएगा। यदि लोग वास्तव में बुनकरों की मदद करना चाहते हैं तो उन्हें हैंडलूम उत्पाद खरीदकर इस परंपरा को बढ़ावा देना होगा।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में कृतिका ने अपनी शादी की साड़ी से जुड़ी भावनात्मक यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी की साड़ी चंदेरी के कारीगरों ने उनकी मां के साथ मिलकर तैयार की थी। उनके अनुसार, उस साड़ी में सिर्फ धागे नहीं, बल्कि कारीगरों की मेहनत और मां का स्नेह भी जुड़ा था। इसलिए वह उनके लिए बेहद खास है।
कृतिका ने बताया कि उनका चंदेरी से पुराना जुड़ाव है। बचपन से वहां आना-जाना रहा, लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि एक हैंडलूम साड़ी तैयार करने में कितनी मेहनत, धैर्य और कौशल लगता है। उनका मानना है कि मशीनों से बनने वाले कपड़ों के दौर में हाथ से तैयार की गई हर वस्तु का अपना अलग महत्व और मूल्य होता है।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी में हैंडलूम के प्रति रुचि बढ़ रही है, लेकिन इसे केवल शादी और त्योहारों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। रोजमर्रा की जिंदगी में भी हैंडलूम को अपनाने की जरूरत है। कृतिका ने बताया कि वह खुद रेड कार्पेट और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी हैंडलूम पहनने की कोशिश करती हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे प्रेरित हों।
कृतिका कामरा ने जोर देकर कहा कि केवल एक दिन सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से बुनकरों की जिंदगी नहीं बदल सकती। वास्तविक बदलाव तब आएगा, जब लोग हैंडलूम उत्पाद खरीदेंगे और स्थानीय कारीगरों को आर्थिक सहयोग मिलेगा। उनके मुताबिक, यही भारतीय हथकरघा परंपरा और लाखों बुनकर परिवारों को मजबूत करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
अभिनय के साथ उद्यमिता की जिम्मेदारी निभाने पर कृतिका ने कहा कि उनके लिए अभिनय पहला प्यार है, लेकिन हैंडलूम से जुड़ा काम केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प और बुनकरों को आगे बढ़ाने का एक प्रयास भी है।
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