यूपीआई (UPI) भुगतान पर शुल्क लगने की चर्चाओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसका बोझ सीधे आम उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा।
मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इस मुद्दे पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और फिलहाल इस पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।
इस बीच, केंद्र सरकार ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत भविष्य में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों से शुल्क लेने का कानूनी प्रावधान किया जा सकता है। हालांकि सरकार के अनुसार, आम उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले नियमित यूपीआई भुगतान पहले की तरह नि:शुल्क बने रहेंगे।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि दूध, सब्जी, किराना और अन्य रोजमर्रा की खरीदारी से जुड़े 90 प्रतिशत से अधिक यूपीआई लेनदेन किसी भी संभावित एमडीआर शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे। यानी सामान्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की संभावना फिलहाल बेहद कम है।
फिलहाल यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड पर कोई एमडीआर लागू नहीं है। प्रस्तावित संशोधन के बाद सरकार को भविष्य में यह तय करने का अधिकार मिलेगा कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लागू होगा और किन्हें इससे छूट मिलेगी। फिलहाल यूपीआई पर शुल्क लगाने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
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