कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद भारत लौटे खिलाड़ियों का दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जोरदार स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और समर्थकों के उत्साह के बीच खिलाड़ियों ने साफ किया कि अब उनका पूरा फोकस अगले महीने होने वाले एशियन गेम्स पर है।
भारतीय मुक्केबाजों ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 10 पदक जीतकर दमदार प्रदर्शन किया, जबकि पैरा एथलेटिक्स टीम ने रिकॉर्ड सात पदक अपने नाम किए। इस प्रदर्शन के दम पर भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा।
स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज प्रिया घंघास ने कहा कि कॉमनवेल्थ में राष्ट्रगान सुनना उनके जीवन का सबसे यादगार पल था, लेकिन अब लक्ष्य एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना है। वहीं साक्षी चौधरी ने कहा कि कॉमनवेल्थ में मिला गोल्ड उनके सपने के सच होने जैसा है, लेकिन अब पूरी तैयारी एशियन गेम्स के लिए होगी।
जैसमीन लांबोरिया ने बताया कि बीमारी के बावजूद उन्होंने स्वर्ण पदक जीता और अब उनका अंतिम लक्ष्य 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक है। सचिन सिवाच ने अपनी सफलता का श्रेय कोचों और तकनीकी सुधार को दिया, जबकि नरेंद्र बरवाल ने कहा कि एशियन गेम्स में कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबले के लिए टीम पूरी तैयारी कर रही है।
रजत पदक विजेता जादूमणि सिंह ने कहा कि वह सिल्वर से संतुष्ट नहीं हैं और एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के इरादे से अपनी कमियों पर काम करेंगे। वहीं अरुंधति चौधरी ने बताया कि उनकी स्पर्धा एशियन गेम्स में शामिल नहीं है, इसलिए उनका अगला लक्ष्य वर्ल्ड कप रहेगा।
पैरा एथलीटों ने भी भविष्य के बड़े लक्ष्य तय किए हैं। स्वर्ण पदक विजेता दिलीप गावित ने पैरालंपिक गोल्ड जीतने की इच्छा जताई, जबकि शर्मिला धनखड़ और सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ की सफलता को आगे भी बरकरार रखने का संकल्प दोहराया।
भारतीय खिलाड़ियों का कहना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स की सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है, लेकिन अब असली चुनौती एशियन गेम्स और उसके बाद 2028 ओलंपिक में देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करना है।
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