उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का रविवार देर रात हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई। कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
हीरा सिंह बिष्ट ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत सत्तर के दशक में डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून के छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में की थी। इसके बाद वह युवा कांग्रेस से जुड़े और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड की राजनीति में एक मजबूत पहचान बनाई। लंबे समय तक इंटक (INTUC) के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाई।
उन्होंने वर्ष 1985 में देहरादून विधानसभा सीट से पहली बार विधायक का चुनाव जीता। इसके बाद 2002 में राजपुर और 2014 में डोईवाला विधानसभा उपचुनाव जीतकर कुल तीन बार विधायक बने। उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.डी. तिवारी के मंत्रिमंडल में उन्होंने परिवहन, श्रम और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी हीरा सिंह बिष्ट की अहम भूमिका रही। उन्होंने पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को जन-जन तक पहुंचाने और आंदोलन को मजबूती देने में सक्रिय योगदान दिया।
उनके निधन पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रीतम सिंह, डॉ. हरक सिंह रावत, सूर्यकांत धस्माना समेत कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उनके योगदान को याद किया।
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