36 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्रालय और उससे जुड़े तंत्र में कई बड़े बदलाव देखने को मिले। आंदोलन का नेतृत्व करने वाले सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) ने इसे युवाओं की जीत बताते हुए कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और छात्रों के मुद्दों को आगे भी उठाया जाएगा।
आंदोलन समाप्त होने के बाद सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण है और युवाओं ने इसी उद्देश्य के साथ अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने सरकार से सभी समुदायों और छात्रों के हित में काम करने की अपील की।
इस आंदोलन की खास बात यह रही कि बिना किसी पंजीकृत राजनीतिक दल या मजबूत जमीनी संगठन के युवाओं ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में समर्थन जुटाया। अलग-अलग राज्यों, विचारधाराओं और वर्गों के लोग इस अभियान से जुड़े और परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा जवाबदेही की मांग को राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया।
आंदोलन के बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई कदम उठाने की घोषणा की है। पेपर लीक के मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की गई है। साथ ही, सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन लाने की तैयारी है, जिसमें दोषियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
आंदोलन के दौरान पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने सहित कई मांगों पर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल युग में युवाओं की संगठित आवाज राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत चर्चाओं को प्रभावित कर सकती है।
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