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JNU में कविता और शायरी की गूंज, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत बचाने पर जोर

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में आयोजित मुशायरा और कवि सम्मेलन में हिन्दी और उर्दू साहित्य का खूबसूरत संगम देखने को मिला। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘रौशनाई’ की ओर से आयोजित ‘महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह’ में देशभर के प्रतिष्ठित कवियों, शायरों, शिक्षाविदों और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान कविता, शायरी और साहित्यिक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समारोह का शुभारंभ गायिका एवं साहित्यकार डॉ. किरण तिवारी ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से किया। संस्था के संरक्षक एवं पीएफ कमिश्नर आलोक यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। वहीं संस्था की संस्थापक और शायरा सिया सचदेव ने कहा कि ‘रौशनाई’ प्रेम, विश्वास, संघर्ष और उम्मीद जैसे मूल्यों को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है।

कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक नुसरत मेहदी को उर्दू भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेश शर्मा ने सम्मान की परंपरा, उसके उद्देश्य और समाजसेवी स्वर्गीय महेंद्र सिंह के योगदान पर प्रकाश डाला।

कवि सम्मेलन और मुशायरे में शामिल कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकार, प्रेम, इंसानियत, सांस्कृतिक विरासत और भाषाई एकता का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी और उर्दू दोनों भाषाएं भारत की साझा सांस्कृतिक धरोहर हैं और इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अल्पना सुहासिनी ने किया। आयोजन के अंत में साहित्यकारों ने इस तरह के आयोजनों को भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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