पेट्रोल में एथेनॉल की बढ़ती मात्रा अब पुराने वाहनों के मालिकों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पांच से छह साल पुराने इंजन वाले वाहनों पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का असर साफ दिखाई दे रहा है। इससे इंजन के कई महत्वपूर्ण हिस्सों पर दबाव बढ़ रहा है, जबकि नई तकनीक से लैस गाड़ियां बिना किसी बड़ी परेशानी के ई-20 ईंधन पर बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के मुताबिक, पुराने इंजन मुख्य रूप से 100 प्रतिशत पेट्रोलियम आधारित ईंधन को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए थे। ऐसे में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का लगातार इस्तेमाल करने से फ्यूल लाइन, रबर सील, पाइप, फ्यूल पंप और इंजन के अन्य हिस्सों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। समय के साथ इंजन की परफॉर्मेंस घटने, माइलेज कम होने और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नई पीढ़ी की गाड़ियों के इंजन ई-20 ईंधन को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं। इन इंजनों में ऐसे मैटेरियल और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ बेहतर तालमेल बिठाते हैं। यही वजह है कि नई गाड़ियों में परफॉर्मेंस और रफ्तार पर कोई खास असर देखने को नहीं मिलता।
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वाहन मालिक अपनी गाड़ी के निर्माता द्वारा जारी ईंधन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें। यदि वाहन ई-20 अनुकूल नहीं है, तो नियमित सर्विसिंग कराएं और इंजन में किसी भी तरह की असामान्य आवाज, स्टार्टिंग में दिक्कत या माइलेज में गिरावट जैसे संकेतों को नजरअंदाज न करें। समय पर देखभाल करने से इंजन की उम्र बढ़ाई जा सकती है और बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।
सरकार देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के साथ पुराने वाहनों के लिए जागरूकता और तकनीकी सलाह भी उतनी ही जरूरी है, ताकि वाहन मालिक अनावश्यक नुकसान से बच सकें।
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