आम आदमी पार्टी से अलग होकर बनी इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) के भाजपा में विलय के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति बन गई है। मुकेश गोयल समेत IVP के 16 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने पर कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिन नेताओं के खिलाफ पार्टी ने पहले चुनावी अभियान चलाया था, आज उन्हें ही संगठन में शामिल करने से कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश गया है।
भाजपा ने वर्ष 2022 के नगर निगम चुनाव में मुकेश गोयल के कथित स्टिंग ऑपरेशन को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था। उस समय पार्टी ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी में उनके भाजपा में शामिल होने से कई पुराने कार्यकर्ता असहज हैं।
कार्यकर्ताओं की दूसरी बड़ी चिंता अगले वर्ष होने वाले नगर निगम चुनाव को लेकर है। उनका मानना है कि वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं की जगह अब भाजपा में शामिल हुए नए पार्षद टिकट के दावेदार बन सकते हैं। इससे लंबे समय से अपने-अपने वार्डों में सक्रिय कार्यकर्ताओं की दावेदारी प्रभावित हो सकती है।
पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि IVP पहले से ही नगर निगम में भाजपा का समर्थन कर रही थी। महापौर चुनाव से लेकर वार्ड समितियों के चुनाव तक भाजपा को उसका सहयोग मिलता रहा। ऐसे में औपचारिक विलय की आवश्यकता को लेकर भी पार्टी के भीतर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि भाजपा नेतृत्व ने इस फैसले को संगठन के विस्तार और एमसीडी में पार्टी की मजबूती की दिशा में अहम कदम बताया है। प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा का कहना है कि इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का भाजपा में विलय विकास के एजेंडे को मजबूत करेगा और इससे संगठन को लाभ मिलेगा।
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