हरियाणा के मुरथल में अब ढाबे पर खाना परोसने का अंदाज भी हाईटेक हो गया है। नेशनल हाईवे-44 स्थित रेशम ढाबे में रोबोटिक वेटर ग्राहकों की टेबल तक खाना और मेन्यू कार्ड पहुंचा रहे हैं। ढाबे में तीन रोबोट लगाए गए हैं, जो बैटरी से चलते हैं और सॉफ्टवेयर चिप व नेविगेशन सिस्टम की मदद से ऑपरेट किए जाते हैं।
ढाबा प्रबंधन के मुताबिक, एक बार चार्ज करने पर रोबोट करीब डेढ़ से दो घंटे तक काम कर सकते हैं। फाइबर से तैयार इन रोबोट्स को आकर्षक लुक देने के लिए आंखों में रेड लाइट लगाई गई है। इनके हाथों पर ट्रे फिक्स है, जिस पर खाना और मेन्यू कार्ड रखा जाता है।
तीन साल पहले आया था रोबोट लगाने का आइडिया
ढाबे के मैनेजर मंगत सिंह के अनुसार, करीब तीन साल पहले ग्राहकों को अलग अनुभव देने के लिए रोबोटिक वेटर लाने का विचार आया था। इसके बाद बेंगलुरु की एक टीम से संपर्क किया गया, जिसने ढाबे की जरूरत के मुताबिक तीन रोबोट तैयार किए।
ग्राहक के पहुंचने पर रोबोट मेन्यू कार्ड लेकर टेबल तक जाता है। ऑर्डर लेने के बाद ढाबे के कर्मचारी खाना तैयार करते हैं और रोबोट ट्रे में खाना रखकर ग्राहक तक पहुंचाता है। रोबोट के आने पर कई ग्राहक मोबाइल से वीडियो और रील भी बनाते हैं।
कंट्रोल रूम से होता है रोबोट का संचालन
रोबोट को चलाने के लिए ढाबे में कंट्रोलिंग रूम बनाया गया है। ऑपरेटर रिमोट और कंट्रोलिंग सिस्टम की मदद से रोबोट की दिशा तय करता है। रोबोट पहियों और बेयरिंग के सहारे चलता है। ढाबा प्रबंधन का कहना है कि रोबोट से खाना सर्व करने के लिए ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता।
ट्रेन से भी टेबल तक पहुंचता है खाना
ढाबे में रोबोट के अलावा खाना पहुंचाने के लिए एक अनोखा ट्रेन सिस्टम भी लगाया गया है। ढाबे की कई टेबल्स को पटरियों से जोड़ा गया है। ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर तक खाना पहुंचाने के लिए इस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।
कंट्रोल रूम में लगे पैनल से ऑपरेटर संबंधित टेबल का नंबर चुनता है। इसके बाद ट्रेन का ट्रैक उसी टेबल की दिशा में सेट किया जाता है और खाना वहां तक पहुंचाया जाता है।
1960 में हुई थी रेशम ढाबे की शुरुआत
मैनेजर मंगत सिंह के मुताबिक, रेशम ढाबे की शुरुआत वर्ष 1960 में सरदार महिंदर सिंह ने की थी। उन्होंने अपने बेटे रेशम सिंह के नाम पर ढाबे का नाम रखा था। अब पारंपरिक ढाबे के साथ हाईटेक रोबोट और ट्रेन सिस्टम यहां आने वाले ग्राहकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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