राजबाड़ा के समीप वनखंडी राम मंदिर परिसर में स्थित नागेश्वर महादेव मंदिर इंदौर के प्राचीन शिव मंदिरों में शामिल है। वर्ष 1912 में तुकोजीराव तृतीय के कार्यकाल में बने इस मंदिर से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं आज भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित हैं।
मंदिर की देखरेख से जुड़े 84 वर्षीय पुजारी पंडित हरिशंकर त्रिवेदी के अनुसार, उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी यहां पूजा-अर्चना कर रही है। मान्यता है कि मंदिर निर्माण से पहले रामजी की प्रतिमा के समीप नाग-नागिन का जोड़ा आकर बैठा था। इसके बाद इसी स्थान पर नागेश्वर महादेव मंदिर बनाने का निर्णय लिया गया।
नागपंचमी पर होती है विशेष पूजा
नागपंचमी के अवसर पर नागेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजन किया जाता है। सावन के दौरान भी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहती है। इस वर्ष नागपंचमी और सावन सोमवार का संयोग होने के कारण पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
1912 में हुआ था मंदिर का निर्माण
मंदिर का निर्माण वर्ष 1912 में होलकर रियासत के तुकोजीराव तृतीय के शासनकाल में हुआ था। मंदिर निर्माण में राज परिवार का भी सहयोग बताया जाता है। समय के साथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ, लेकिन इसकी प्राचीन दीवारें आज भी मौजूद हैं।
नाग-नागिन के जोड़े से जुड़ी है मान्यता
पुजारी के अनुसार, मंदिर निर्माण से पहले जब भवन को हटाने का काम चल रहा था, तभी नाग-नागिन का जोड़ा रामजी की प्रतिमा के पास आकर बैठ गया था। पूजा के बाद दोनों सर्प वहां से चले गए। इसके बाद सहमति से नागेश्वर महादेव की प्राण-प्रतिष्ठा की गई।
मंदिर में लगी है देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा
मंदिर की दीवारों में बने कई आलियों में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनमें देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा भी शामिल है। लंबे समय से यह मंदिर आसपास के दुकानदारों और स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
कभी घने वन से घिरा था क्षेत्र
मंदिर के आसपास कभी घने पेड़ और वन क्षेत्र हुआ करता था। इसी वजह से परिसर को वनखंडी राम मंदिर के नाम से जाना गया। समय के साथ शहर के विकास और निर्माण कार्यों के कारण यहां हरियाली कम होती गई। आज मंदिर शहर के व्यस्ततम हिस्से में दुकानों के बीच स्थित है।
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