उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में टिकट वितरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। एक अंडरकवर जांच में कई राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों पर विधानसभा टिकट के बदले करोड़ों रुपए की मांग करने के आरोप लगे हैं। जांच में दावा किया गया है कि सीट और पार्टी की राजनीतिक स्थिति के आधार पर टिकट के लिए 2 करोड़ से 8 करोड़ रुपए तक की रकम मांगी जा रही है।
जांच के दौरान विभिन्न दलों के नेताओं और पदाधिकारियों से बातचीत में कथित तौर पर टिकट दिलाने के बदले आर्थिक सहयोग की मांग की गई। कुछ मामलों में रकम का हिस्सा पहले और बाकी टिकट घोषित होने से पहले देने की बात भी सामने आई।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सत्ता पक्ष के सहयोगी दलों के साथ-साथ विपक्षी गठबंधन से जुड़े कुछ दलों के पदाधिकारियों ने भी टिकट वितरण को लेकर आर्थिक लेनदेन की चर्चा की। बातचीत में कई नेताओं ने पिछली बार के चुनावों का हवाला देते हुए टिकट के लिए करोड़ों रुपए खर्च होने का दावा किया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टिकट वितरण में धनबल की भूमिका बढ़ती है तो इससे राजनीति में पारदर्शिता और योग्य उम्मीदवारों की भागीदारी प्रभावित हो सकती है। साथ ही चुनावी प्रक्रिया में काले धन के इस्तेमाल और राजनीतिक फंडिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन की आशंका भी बढ़ जाती है।
हालांकि, इस मामले में संबंधित राजनीतिक दलों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सामने आए इस खुलासे ने टिकट वितरण की प्रक्रिया और राजनीतिक दलों की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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