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लखनऊ में बड़ा फर्जीवाड़ा: प्लॉट दिलाने के नाम पर 3.17 करोड़ की ठगी, अफसरों के लिए 2.86 लाख के मोबाइल लिए

लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र में एक कारोबारी से आवास विकास परिषद में प्लॉट आवंटित कराने के नाम पर 3.17 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी ने खुद को आवास विकास परिषद का कर्मचारी बताया और अधिकारियों से करीबी होने का दावा कर प्लॉट दिलाने का भरोसा दिया। मामले में पीजीआई पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

तीन साल पहले हुई थी आरोपी से मुलाकात

पीजीआई के शारदा नगर निवासी कारोबारी अविहर्ष शुक्ला के मुताबिक, करीब तीन साल पहले उनके सीए अक्षय गुप्ता ने उनकी मुलाकात रायबरेली के बिनोहारा निवासी यशवंत सिंह से कराई थी। यशवंत ने खुद को आवास विकास परिषद का कर्मचारी बताते हुए परिषद से प्लॉट आवंटित कराने का दावा किया।

पीड़ित के अनुसार, प्लॉट के लिए 3.17 करोड़ रुपये में सौदा तय हुआ। इसके बाद आरोपी ने अलग-अलग समय पर रकम लेना शुरू किया।

दो करोड़ 32 लाख रुपये और मोबाइल लिए

अविहर्ष का आरोप है कि यशवंत ने कई बार में आवास विकास परिषद के मुख्यालय में उनसे 2.32 करोड़ रुपये लिए। इसके बाद अधिकारियों को देने के नाम पर 2.86 लाख रुपये कीमत के दो मोबाइल फोन भी ले लिए।

पीड़ित के मुताबिक, चार जुलाई 2024 को आरोपी ने उनसे 85 लाख रुपये और लिए। इसके बाद आवास विकास परिषद की मुहर लगा एक आवंटन पत्र दिया गया, जिसे बाद में जांच कराने पर फर्जी पाया गया।

जांच में सामने आई फर्जी पहचान

आवंटन पत्र पर शक होने के बाद अविहर्ष ने इसकी जांच कराई। आवास विकास परिषद में पूछताछ करने पर पता चला कि यशवंत सिंह नाम का कोई कर्मचारी वहां कार्यरत ही नहीं है। इसके बाद पीड़ित ने आरोपी से रकम वापस मांगनी शुरू की।

आरोप है कि आरोपी जुलाई 2026 तक रकम लौटाने का आश्वासन देता रहा। बाद में उसने पीड़ित को झूठे मामले में फंसाने और हत्या की धमकी भी दी।

तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर

पीड़ित ने मामले में यशवंत सिंह के साथ पूजा इंटरप्राइजेज कंपनी और समरेश यादव की भूमिका होने का भी आरोप लगाया है। शिकायत के बाद उन्होंने डीसीपी दक्षिणी मुश्ताक से मामले की शिकायत की।

इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह के अनुसार, प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाई गई है। मामले की विवेचना शिवेंद्र प्रताप सिंह कर रहे हैं। पीड़ित को संबंधित दस्तावेजों के साथ बुलाया जाएगा। जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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