दिल्ली के दो बड़े सरकारी अस्पतालों—एम्स और सफदरजंग—में इलाज कराने के लिए मरीजों और तीमारदारों को रातभर इंतजार करना पड़ रहा है। ओपीडी की पर्ची और डॉक्टर तक पहुंचने के लिए लोग शाम से ही अस्पताल के बाहर कतार में लग जाते हैं। रात बढ़ने के साथ भीड़ बढ़ती जाती है और कई लोग फुटपाथ पर ही सुबह होने का इंतजार करते हैं।
रात आठ बजे से लगने लगी कतार
एम्स के गेट नंबर एक और छह के बाहर रविवार रात करीब आठ बजे करीब 40 लोग कतार में खड़े थे। सोमवार सुबह ओपीडी की पर्ची लेने के लिए लोग कई घंटे पहले ही पहुंच गए थे। मध्यरात्रि तक यह संख्या करीब 100 और रात 1:30 बजे तक लगभग 300 हो गई। कई मरीज और तीमारदार चादर बिछाकर या फुटपाथ पर बैठकर रात गुजारते दिखे।
दूर-दराज से आए मरीजों के साथ बुजुर्ग और बच्चे भी थे। बारिश के दौरान लोगों ने अपनी जगह बचाने के लिए चप्पल, बोतल और दूसरे सामान का सहारा लिया। कई लोग भीगने के बावजूद कतार छोड़ने को तैयार नहीं थे, क्योंकि उन्हें डर था कि जगह छूटी तो इलाज का नंबर भी छूट सकता है।
सफदरजंग में भी आधी रात से जुटे मरीज
सफदरजंग अस्पताल में भी हालात कुछ अलग नहीं दिखे। रविवार रात आधी रात के बाद मरीज और तीमारदार ओपीडी में नंबर मिलने की उम्मीद में कतार में लगने लगे। सुबह करीब 6:30 बजे तक लाइन लगातार बढ़ती रही।
इमरजेंसी में भी मरीजों की भारी आवाजाही रही। बैठने की जगह कम होने के कारण कई मरीज और तीमारदार फर्श पर चादर या प्लास्टिक बिछाकर बैठे नजर आए। बिहार और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से आए लोगों ने रातभर अस्पताल में इंतजार किया।
एम्स ट्रॉमा सेंटर में भी परेशान मरीज
एम्स ट्रॉमा सेंटर के वेटिंग हॉल में भी रात के समय मरीज और तीमारदार बड़ी संख्या में मौजूद थे। कई बेंच टूटी हुई थीं और वेटिंग एरिया में पर्याप्त जगह नहीं थी। गर्मी से राहत देने के लिए लगे एसी भी प्रभावी नहीं दिखे। ऐसे में परिवार घंटों बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
सुबह गेट खुलते ही बढ़ी भीड़
सुबह करीब चार बजे एम्स के गेट खुले तो रातभर इंतजार कर रहे मरीज और तीमारदार ओपीडी की तरफ बढ़ने लगे। इसके बाद परिसर के अंदर भी लंबी कतार लग गई। सुबह आठ बजे ओपीडी शुरू होने के बाद पंजीकरण काउंटर पर भी भीड़ रही और करीब 8:30 बजे पर्चियां मिलनी शुरू हुईं। यह प्रक्रिया करीब 11 बजे तक चली।
एम्स के गेट नंबर एक के बाहर दिल के मरीजों की कतार करीब एक किलोमीटर तक पहुंच गई। भीड़ बढ़ने के दौरान धक्का-मुक्की और विवाद की स्थिति भी बनी। कुछ मरीजों ने सुरक्षा गार्डों पर बदसलूकी और धक्का देने के आरोप लगाए।
ऑनलाइन पंजीकरण से मिल सकती है राहत
एम्स प्रशासन के अनुसार, ओपीडी में रोजाना औसतन करीब 7,200 मरीज पहुंचते हैं, जबकि इमरजेंसी में 400 से 500 से अधिक मरीज आते हैं। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि ऑनलाइन पंजीकरण और अपॉइंटमेंट व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है, ताकि मरीजों को रात में अस्पताल के बाहर इंतजार न करना पड़े।
एम्स की जनसंपर्क अधिकारी डॉ. रीमा दादा ने कहा कि सुरक्षा कर्मियों को मरीजों की अनौपचारिक लाइन या टोकन जारी करने के बजाय अस्पताल में सुरक्षा और आवाजाही सुचारु रखने के निर्देश हैं। वहीं सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने कहा कि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित सेवाएं देने के लिए व्यवस्थाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है।
एम्स में ओपीडी पंजीकरण: मरीज ओआरएस पोर्टल के जरिए घर बैठे अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। बिना अपॉइंटमेंट आने वाले मरीजों के लिए काउंटर और स्कैन आधारित टोकन की सुविधा भी उपलब्ध है।
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