चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम को मंगलवार को बड़ा झटका लगा। हैनान स्थित वेनचांग लॉन्च साइट से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद चीन का लॉन्ग मार्च 7A रॉकेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रॉकेट के साथ भेजा जा रहा सैटेलाइट भी इस हादसे में नष्ट हो गया। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।
उड़ान के करीब 85 सेकंड बाद आई खराबी
लॉन्ग मार्च 7A ने वेनचांग लॉन्च सेंटर से उड़ान भरी थी। शुरुआती चरण में रॉकेट सामान्य तरीके से आगे बढ़ता दिखाई दिया, लेकिन करीब 85 सेकंड बाद इसमें तकनीकी खराबी सामने आई। इसके बाद रॉकेट में विस्फोट हो गया और मिशन विफल हो गया।
यह लॉन्ग मार्च 7A रॉकेट का अब तक का पहला असफल मिशन बताया जा रहा है। हादसे में रॉकेट के साथ मौजूद पेलोड यानी सैटेलाइट भी नष्ट हो गया।
क्यों अहम है लॉन्ग मार्च 7A?
लॉन्ग मार्च 7A चीन के प्रमुख मध्यम से भारी श्रेणी के लॉन्च वाहनों में शामिल है। इसे मुख्य रूप से बड़े सैटेलाइट को जियोस्टेशनरी ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) तक पहुंचाने के लिए विकसित किया गया है। इसका निर्माण चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी ने किया है।
रॉकेट में लिक्विड-फ्यूल इंजन वाला मुख्य चरण और उससे जुड़े बूस्टर शामिल हैं। इसका डिजाइन भारी पेलोड को अपेक्षाकृत ऊंची कक्षाओं तक पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।
विस्फोट की वजह अभी साफ नहीं
रॉकेट में विस्फोट आखिर किस वजह से हुआ, इसकी अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। जांच के दौरान रॉकेट से मिले टेलीमेट्री डेटा और अन्य तकनीकी आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि उड़ान के शुरुआती चरण में किस सिस्टम में खराबी आई।
लॉन्च के शुरुआती कुछ मिनट रॉकेट के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान उसे तेज गति, बदलते वायुदाब और भारी कंपन जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।
चीन के बढ़ते लॉन्च कार्यक्रम को झटका
चीन पिछले कुछ वर्षों में अपने अंतरिक्ष अभियानों और रॉकेट लॉन्च की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी कर रहा है। लॉन्ग मार्च सीरीज उसके ऑर्बिटल लॉन्च कार्यक्रम की प्रमुख रीढ़ है। ऐसे में लॉन्ग मार्च 7A की यह विफलता चीन के अंतरिक्ष उद्योग के लिए महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है।
हालांकि, इस एक हादसे से चीन के व्यापक अंतरिक्ष कार्यक्रम में बड़े बदलाव की संभावना कम है। अब इंजीनियरों की प्राथमिकता विस्फोट की वास्तविक वजह का पता लगाने और भविष्य के मिशनों में ऐसी तकनीकी खराबी को रोकने पर होगी।
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